दूसरी लापरवाही- स्टीमर लेकर नहीं आया चालक
ग्रामीणों के मुताबिक, 22 लोगों की क्षमता वाली नाव में लगभग 50 लोग सवार थे। तीन बाइकें व छह साइकिल भी लदी थीं। ज्यादा वजन की वजह से नाव को मोड़ते समय पतवार टूट गई। इससे नाव डूब गई। कुछ दूरी पर बन रहे पुल के स्टीमर के चालक को बचाव के लिए आवाज लगाई गई, लेकिन वह नहीं आया। लोगों का कहना है कि स्टीमर आ जाता तो कई लोगों की जान बच जाती।
तीसरी लापरवाही- चेतावनी के बाद भी नहीं रोका गया संचालन
जिलाधिकारी ने मई में सभी एसडीएम को आदेश दिए थे कि बाढ़ और बारिश के समय अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी करें। बाढ़ सहायता एवं निगरानी केंद्र बनाए जाएं। एक हफ्ते पहले भी प्रशासन की ओर से निर्देश दिया गया था कि यमुना नदी उफान पर है। ऐसे में अगर लहर उठ रही है तो नाव न चलाएं। बावजूद इसके नावों का संचालन नहीं रोका गया है।
चौथी लापरवाही- तो बच जाती लोगों की जान
यहां के 12 से 15 गांवों की 25 हजार की आबादी रोज यमुना पार जाने के लिए नाव से ही आवागमन करती है। छह नावों से रोज करीब 1400 से 1600 लोगों का आवागमन होता है। ऐसे में एक नाव में एक बार में 30 से 35 लोग एक साथ यात्रा करते हैं। लोगों का कहना है कि अगर पुल चालू हो गया होता तो शायद इतना बड़ा हादसा नहीं होता।
हवा तेज होने से दूसरी नाव नहीं आ सकी
ग्रामीणों का कहना है कि यमुना नदी के किनारे कलुआ गैंग और बाबू गैंग की छह नाव लगी रहती हैं। ये लोगों को नदी पार कराते हैं। जब बाबू निषाद की नाव डूबने लगी तो दूसरी नाव जाने लगी, मगर हवा इतनी तेज थी कि दूसरी नाव कुछ दूर चलकर लौटने लगती थी। अगर हवा तेज नहीं होती दूसरी नाव से लोगों को बचाया जा सकता था।
11 साल में 25 करोड़ बढ़ा बजट, फिर भी अधूरा पुल
मर्का कस्बे से 2011 में यमुना नदी पर पुल बनना शुरू हुआ था। 2014 तक पुल चालू करने का लक्ष्य था, लेकिन बजट की कमी के चलते ऐसा नहीं हो सका। इसमें अधिकारियों की लापरवाही भी है। इसके लिए तीन बार इस्टीमेट रिवाइज किया गया। पहले 54.89 करोड़ की लागत से पुल बनना था। इसके बाद 65 करोड़ और फिर 89 करोड़ का रिवाइज इस्टीमेट बना। पहले इस काम को चित्रकूट इकाई करा रही थी। अब बांदा डिवीजन सेतु निगम के पास काम है। तीसरी बार बजट रिवाइज होने के बाद जनवरी 2022 से काम शुरू हुआ था, लेकिन अब तक काम पूरा नहीं हो सका है।