पुलिस ने विवेचना कर फतेहपुर करमपुर निवासी संजय उर्फ दिलीप के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म व पॉक्सो अधिनियम की चार्जशीट कोर्ट में प्रस्तुत की। यह मुकदमा विशेष न्यायाधीश पॉक्सो मनराज सिंह की कोर्ट में चला। अभियोजन के अनुसार शुरुआत में पीड़िता ने 161 व 164 में आरोपी के खिलाफ बयान दर्ज कराए। बाद में दोनों पति-पत्नी के रूप में दिल्ली में रहने लगे। दोनों के दो संतान भी हैं, लेकिन घटना के समय पीड़िता के नाबालिग होने व तीन माह बाद हुई बरामदगी के समय उसके गर्भवती होने के कारण कोर्ट ने दोषी को दंडित किया। बहस में विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो जितेंद्र सिंह तोमर, मृदुल मिश्रा ने नाबालिग लड़की के अपहरण व दुष्कर्म के दोषी को कठोर दंड देने की बात कही।
वहीं, बचाव पक्ष के अधिवक्ता ब्रह्मस्वरुप गुप्ता ने दोषी व पीड़िता के पति-पत्नी के रूप में साथ-साथ रहने व उनके दो बच्चे भी होने का हवाला देकर रहम की मांग की। स्वयं पीड़िता भी कोर्ट में आरोपी पति के पक्ष में गुहार करती दिखी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद एडीजे मनराज सिंह ने फतेहपुर करमपुर निवासी संजय उर्फ दिलीप को सात साल के कठोर कारावास व 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। सजा पाए संजय उर्फ दिलीप को जिला कारागार इटावा भेज दिया गया।