इस बार मानसून पर अलनीनो का प्रभाव नज़र आने लगा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि इससे दक्षिण पश्चिम मानसून कमजोर पड़ जाता है। इसके प्रभाव से सामान्य से कम वर्षा होती है। गंगा के मैदानी इलाकों के अध्ययन से पता चला है कि अलनीनो प्रभावित वर्षों में वर्षा सामान्य से कम हुई है। इसके अलावा अलनीनो के प्रभाव वर्षा का पैटर्न अराजक हो गया। खासतौर पर जुलाई और अगस्त के महीनों में लंबे लंबे ड्राई पैच आए। इससे खेती किसानी में दिक्कत हुई। सूखे की स्थिति पैदा हो गई। इसके अलावा मानसून के दिनों में तापमान सामान्य औसत से अधिक रहा है।