कानपुर देहात। अकबरपुर क्षेत्र के रहने वाले एक अधिवक्ता पर करीब पांच साल पहले पॉक्सो एक्ट के मामले की पीड़िता की पहचान उजागर करने का मामला दर्ज किया गया था। जिसकी सुनवाई दौरान अदालत में कोई साक्ष्य साबित न होने पर अपर जिला जज पॉक्सो की अदालत ने अधिवक्ता को दोषमुक्त कर दिया है।
कचहरी में वकालत कर रहे अकबरपुर क्षेत्र के रहने वाले अधिवक्ता पर क्षेत्र के रहने वाले एक शक्स ने पांच साल पहले अपनी अवयस्क पुत्रियों के साथ हुई छेड़छाड़ की घटना की थाना अकबरपुर में दर्ज एफआईआर के साथ उनकी पहचान उजागर करते हुए सोशल मीडिया पर टिप्पणी कर वायरल करने छवि धूमिल कर सामाजिक प्रतिष्ठा खराब करने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले की विवेचना कर आरोपी अधिवक्ता रामनरेश मिश्रा के खिलाफ आरोप पत्र अदालत में दाखिल किए थे। मामले की सुनवाई अपर जिला जज पॉक्सो एक्ट बाकर शमीम रिजवी की अदालत में चल रही थी। अदालत ने मामले की सुनवाई दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी के खिलाफ कोई भी साक्ष्य न पाते हुए उसे दोषमुक्त कर दिया है।
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मामले में मात्र वादी की हुई थी गवाही
दोषमुक्त हुए अधिवक्ता रामनरेश मिश्रा ने बताया कि मामले में अभियोजन की ओर से मात्र वादी मुकदमा को अदालत में पेश कर उसकी गवाही कराई गई थी। जिसने बचाव पक्ष की जिरह दौरान यह स्वीकार किया था कि उसके खिलाफ कई मुकदमों में वह अधिवक्ता है साथ ही यह भी स्वीकार किया था कि उसने थाने में तहरीर लोगों के बताने के अनुसार दिया है। साथ ही मामले में अन्य कोई साक्ष्य पेश न करने की बात कही थी। इस पर अदालत ने अभियोजन साक्ष्य समाप्त कर दोनों पक्षों को सुनकर उन्हें निर्दोष करार दिया है।