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Pollution Control: जिला प्रशासन और ईंट-भट्ठा एसोसिएशन का फैसला, जनवरी तक बंद रहेंगे कानपुर के सभी ईंट-भट्ठे

Sun, 28 Aug 2022 10:11 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

हर साल सर्दी में बढ़ने वाले प्रदूषण को काम करने के लिए जिला प्रशासन और ईंट-भट्ठा एसोसिएशन ने फैसला लिया है। पहले मानसून सीजन खत्म होने के बाद अक्तूबर में ही भट्ठे शुरू हो जाते थे।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर में वायु प्रदूषण को सर्दियों में बढ़ने से रोकने के लिए जिला प्रशासन और ईंट-भट्ठा मालिकों ने बड़ा फैसला लिया है। पिछले सप्ताह जिला पर्यावरण समिति की बैठक में हुई चर्चा के बाद तय हुआ है कि भट्ठे फरवरी 2023 के पहले सप्ताह से शुरू होंगे।

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वैसे मानसून खत्म होने के बाद अक्तूबर में भट्ठों का संचालन शुरू हो जाता है। दरअसल, सर्दी में घने कोहरे के बीच भट्ठों की चिमनियों से निकलने वाले धुएं की वजह से हवा की गुणवत्ता और खराब हो जाती है।जिला प्रशासन, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और कानपुर ब्रिक क्लीन ओनर्स एसोसिएशन के बीच सहमति बन गई है।
कानपुर नॉन अटेनमेंट शहरों की सूची में शामिल है। इस वजह से यहां भी यह व्यवस्था लागू की गई है। नॉन अटेनमेंट शहर वे होते हैं, जो पांच साल में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में विफल रहे हैं। अध्यक्ष गोपी श्रीवास्तव ने बताया कि प्रशासन के साथ हुई चर्चा के बाद भट्ठे बंद रखने का फैसला लिया गया है।

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जिले में ढाई सौ भट्ठे
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर 250 ईट भट्ठे हैं। प्रत्येक भट्ठे से औसतन 20 से 25 लाख ईंट हर साल बनाकर बेची जाती हैं। गोपी श्रीवास्तव कहते हैं कि पहले यह आंकड़ा 50 लाख तक पहुंच जाता था, लेकिन अब काम करने का समय कम हो गया है। यही वजह है कि कम उत्पादन का असर कीमत और सप्लाई पर भी पड़ा है।
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