जिले में ढाई सौ भट्ठे
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर 250 ईट भट्ठे हैं। प्रत्येक भट्ठे से औसतन 20 से 25 लाख ईंट हर साल बनाकर बेची जाती हैं। गोपी श्रीवास्तव कहते हैं कि पहले यह आंकड़ा 50 लाख तक पहुंच जाता था, लेकिन अब काम करने का समय कम हो गया है। यही वजह है कि कम उत्पादन का असर कीमत और सप्लाई पर भी पड़ा है।