चकरनगर। बंसरी गांव एक बार फिर खौफ के साए में आ गया है। सन 1999 से लेकर 2020 तक करीब 22 हत्याएं हो गई थीं। उस समय जमीन और घरेलू विवादों के कारण हर साल किसी न किसी की जान जाने वाले इस गांव में पिछले पांच वर्षों से शांति बनी हुई थी। ग्रामीण खुलकर सांस लेने लगे थे और पुरानी कड़वी यादों को पीछे छोड़ सामान्य जिंदगी की ओर लौट रहे थे, लेकिन बीते चार नवंबर को हुए कुल्हाड़ी हमले ने फिर गांव के लोगों को वही पुराना समय याद दिला दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल युवक की सोमवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत की खबर फैलते ही गांव में सन्नाटा पसर गया और लोगों के दिलों में दुबकी पुरानी दहशत फिर जाग उठी। गांव के किशन बिहारी, अपरवल सिंह, सुनील कुमार, मेघ सिंह, रजपाल सिंह, महिपाल सिंह कल्लू पहलवान देवराज आदि ग्रामीणों का कहना है कि गांव में बीते 25 वर्षों में मुन्ना सिंह परिहार, होम सिंह, उगड़ सिंह, पुत्तू सिंह, रणवीर सिंह, हरी सिंह लेखपाल, पप्पू, अमर सिंह, सर्वेश, गुड्डू, सुरज सिंह, लोटन दर्जी, आददा वाल्मीक,मुन्नी वाल्मीक सहित करीब 22 लोगों ने रंजिशों में जान गंवाई है, जिसके बाद वह माहौल धीरे धीरे बदल रहा था, लेकिन यह मांधो परिहार की ताजा घटना पुराने जख्मों को कुरेद गई है। आरोपियों के मोहल्ले में पसरा सन्नाटा है।