कानपुर देहात। दलीप नगर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में शुक्रवार को फसल अवशेष प्रबंधन प्रशिक्षण का समापन हो गया। किसानों ने पराली न जलाने की शपथ ली। इसके साथ ही उन्हें प्रमाण पत्र दिए गए। कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डॉक्टर अजय कुमार सिंह ने बताया कि पराली जलाने से खेत की मिट्टी में मौजूद कीट व केंचुए नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने अवशेषों से कंपोस्ट, बायोगैस, मशरूम उत्पादन व पैकिंग सामग्री बनाने के विकल्प सुझाए। डॉक्टर दीपक मिश्रा ने बताया कि धान की पीबी 1509 और पीबी 1692 जैसी कम अवधि की किस्मों की बोआई करने से अगली फसल (गेहूं) के बीच पराली प्रबंधन के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है। डॉक्टर खलील खान ने बताया कि जीरो टिल ड्रिल, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर और स्मार्ट सीडर से बुवाई कर सकते हैं। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य सुधारने पर जोर दिया। बाद में प्रशिक्षण पूरा करने पर 25 किसानों को प्रमाणपत्र दिए। यहां डॉक्टर राजेश राय, डॉक्टर शशिकांत, डॉक्टर निमिषा अवस्थी, चरन सिंह, अशोक व जय सिंह आदि मौजूद रहे। (संवाद)