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जयाप्रदा ने खोले 'दिल के राज', जानिए नए दौर की राजनीति और 'फिल्मों के कंटेन्ट' पर क्या कह रहीं

Fri, 24 Aug 2018 07:24 PM IST
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
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जयाप्रदा
बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री जयाप्रदा एक बार फिर अभिनय की दुनिया में वापसी कर रही हैं। उनका कहना है कि वह अभिनय से दूर नहीं रहना चाहती हैं। जया काफी समय के बाद अभिनय की दुनिया में आ गई है। वह एंड टीवी के नए शो 'परफेक्ट पति' से पहली बार टीवी पर डेब्यू कर रही हैं। जया का कहना है कि आज के दौर की राजनीति बहुत बदली है। फिल्मों की कहानियों के बारे में कहा कि अगर कंटेन्ट अच्छा है तो कोई भी कहानी मार्केट में चल जाएगी। कहानी का कंटेंट फिल्म स्टार से भी बड़ा है। जब कहानी का कंटेन्ट अच्छा नहीं होता तब बड़े-बड़े स्टार्स की फिल्में पर्दे पर धूल फांकती हैं।  
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- मुझे मेरे कल्चर और आर्ट से बहुत प्यार ...
 
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जयाप्रदा
उन्होंने कहा कि यह सच है कि 'मैं कुछ दिनों के लिए इस दुनिया से दूर जरूर गई थीं। लेकिन मुझे मेरे कल्चर और आर्ट से बहुत प्यार है। इसलिए मैंने हमेशा यह बात ध्यान में रखी कि चाहे जो भी हो हमेशा के लिए अभिनय से दूर नहीं रहूंगी। मैं अभिनय को कभी अलविदा नहीं का सकती हूं।'
जया ने अपने नए शो के बारे में बताया कि परफेक्ट पति एक अलग तरह का शो है। इस शो में राजश्री राठौर के किरदार में जया दिखेंगी। इस सो का कंटेन्ट बिल्कुल अलग है। अब तक मैने जो भी काम किया उसकी वजह से लोगों के दिमाग में मैं हमेशा जीवंत रही हूं। विचारों को अलग पैमाने पर फिल्में ले जाती हैं मैं हमेशा ऐसी फिल्में और सीरियल करना पसंद करती हूं।
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- आज के युग की लड़कियां अलग सोच की हैं....
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जयाप्रदा
आज के युग की लड़कियां अलग सोच की हैं तो उन्हें वैसा पति भी मिलना चाहिए। बहुओं को अपनी सास को मां की तरह देखना चाहिए। बड़े पर्दे और छोटे पर्दे में बहुत बड़ा अंतर है। मैने पॉलिटिक्स में भी काम किया। मैं हमेशा दिल से काम करती हूं। जो सही लगता है वही हमेशा करती हूं।  जया ने कहा कि फिल्मों के निर्माण का तरीका अब बहुत बड़ा है। अब रियल स्टोरी पर ज्यादा काम होता है। पहले एपिक करेक्टर या काल्पनिक कहानियों पर काम होता था। आजकल कहानियां टेक्नलॉजी और कहीं न कहीं सच्ची घटनाओं के इर्द गिर्द तैयारी हो रही हैं। 
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः-  डांस, म्यूजिक मेरे लिए पैशन...

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jaya prada
जया ने कहा कि कई लोगों की यह शिकायत थीं कि मैं एक्टिंग से दूर क्यों हो गई हूं लेकिन अब मैं लौट आई हूं। साथ ही मैं कहना चाहूंगी कि डांस, म्यूजिक मेरे लिए पैशन रहा है। इसलिए यह मेरे लिए खास मौका है।
जया ने कहा कि मुझे ऐसा लग रहा है कि मैं एक बार फिर से महसूस कर रही हूं कि मैं एक स्ट्रगलर हूं क्योंकि मैंने इससे पहले मैंने टीवी कभी किया नहीं है। काफी लोगों ने टीवी करने से मना किया था लेकिन मैंने इसे चैलेंज जैसा लिया है कि फिल्मों के बाद अब ये भी शो करूं। एंड टीवी पर परफेक्ट पति तीन सितंबर से शुरू होने जा रहा है। इस सीरियल में जया प्रदा राजश्री राठौर के किरदार में नजर आएंगी। 
आगे की स्लाइड मेंः जानिए जया प्रदा के बारे में ....
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jaya prada
जयाप्रदा (जन्म 3 अप्रैल 1962) भारतीय फ़िल्म अभिनेत्री और राजनीतिज्ञ हैं। जयाप्रदा का जन्म ललिता रानी के रूप में, भारत के आंध्र प्रदेश राज्य में स्थित राजमंड्री के एक मध्यम-वर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता कृष्णा एक तेलुगू फ़िल्म फाइनेंशियर थे। उनकी मां नीलवाणी ने उन्हें कम उम्र में ही नृत्य और संगीत कक्षाओं में दाख़िल कर दिया था। जब वह 14 वर्ष की थीं, तब उन्होंने अपने स्कूल के वार्षिक समारोह में एक नृत्य प्रदर्शन किया। दर्शकों में एक फ़िल्म निर्देशक भी शामिल थे और उन्होंने जयाप्रदा से तेलुगू फ़िल्म 'भूमिकोसम' में तीन मिनट के नृत्य प्रदर्शन की पेशकश की। जयाप्रदा हिचकिचाईं, लेकिन उनके परिवार ने उन्हें प्रस्ताव स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्हें फ़िल्म में अपने काम के लिए केवल 10 रुपए दिए गए, पर उन्हें और भी बड़े मौक़े मिले, जब फ़िल्म के उन तीन मिनटों के अंश को तेलुगू फ़िल्म उद्योग की प्रमुख हस्तियों को दिखाया गया और उनके सामने प्रस्तावों की बाढ़ आ गई।
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अलवर पहुंची जयाप्रदा - फोटो : amar ujala
बड़े फ़िल्म निर्माताओं ने उनके सामने अपनी विशेष दर्जे की फ़िल्मों में भूमिकाओं की पेशकश की और उन्होंने स्वीकार कर लिया। 1976 में हिट की तिकड़ी के साथ, एक बड़ी स्टार बन गईं: के. बालचंदर की अंतुलेनी कथा, जिसमें उनके नाटकीय कौशल को समेटा गया; के. विश्वनाथ की सिरी सिरी मुव्वा, जिसमें उन्होंने शानदार नृत्य कौशल वाली एक मूक लड़की की भूमिका निभाई और सीता की शीर्षक भूमिका में बड़े बजट वाली पौराणिक फ़िल्म सीता कल्याणम्, जिसने उनकी बहुमुखी प्रतिभा की पुष्टि की। 1977 में उन्होंने अडवी रामुडु में अभिनय किया, जिसने बॉक्स ऑफ़िस के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और स्थाई रूप से उन्हें एक स्टार का दर्जा दिया। जयाप्रदा तथा सह-अभिनेता एन.टी. रामराव पर फ़िल्माया गया गीत "आरेसुकोबोई पारेसुकुन्नानु" जनता के बीच ज़बरदस्त हिट साबित हुआ। उन्होंने तेलुगू फ़िल्मों से बाहर निकल कर, तमिल, मलयालम और कन्नड़ फ़िल्मों में भी अभिनय किया और उनकी इन सब भाषाओं में फ़िल्में सफल रहीं।
 
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jaya prada - फोटो : हनी मिश्रा
के. विश्वनाथ ने फ़िल्म सिरी सिरी मुव्वा (1976) का पुनर्निर्माण हिंदी में सरगम शीर्षक से किया और सन् 1979 में जयाप्रदा को बॉलीवुड से परिचित कराया. फ़िल्म ज़बरदस्त हिट हुई और वे रातों रात वहां भी स्टार बन गईं। उन्होंने बतौर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पहला फ़िल्मफ़ेयर नामांकन अर्जित किया, लेकिन अपनी सफलता को भुना नहीं सकीं, क्योंकि वे हिंदी नहीं बोल सकती थीं।[2] इसके तीन साल बाद निर्देशक के। विश्वनाथ ने हिट फ़िल्म 'कामचोर' (1982) के ज़रिए हिंदी फ़िल्मों में दुबारा प्रवेश कराया, जहां पहली बार वे धाराप्रवाह हिन्दी बोलती नज़र आईं.[3] अब वे लगातार हिन्दी फ़िल्मों में काम करने में सक्षम बनीं और प्रकाश मेहरा की फ़िल्म शराबी (1984) में अमिताभ बच्चन की प्रेमिका के रूप में और के। विश्वनाथ की 'संजोग' (1985 की फ़िल्म) में अपनी चुनौतीपूर्ण दोहरी भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के रूप में दो और फ़िल्मफ़ेयर नामांकन अर्जित किए।
 

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जया प्रदा
अपने बॉलीवुड फ़िल्म कॅरिअर के साथ, उन्होंने दक्षिण में के. विश्वनाथ की तेलुगू हिट फ़िल्म 'सागर संगमम' (1983) जैसी सराहनीय फ़िल्मों में काम करना जारी रखा। उनके प्रशंसकों में न केवल आम जनता शामिल थीं, बल्कि महान भारतीय निर्देशक सत्यजीत रे भी, जिन्होंने कहा कि वे विश्व की सबसे सुंदर महिलाओं में से एक हैं।[4] हालांकि, उन्होंने बंगाली फ़िल्मों में भी अभिनय किया है, लेकिन कभी रे के लिए काम नहीं किया। (उन्होंने दावा किया कि रे के मन में उनके साथ एक फ़िल्म बनाने का विचार था, लेकिन उनकी बीमारी और मृत्यु के बाद यह सहयोग संभव नहीं हो पाया।)[5]
 

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जया प्रदा
जयाप्रदा ने न केवल अमिताभ बच्चन और जितेंद्र के साथ सफल जोड़ी बनाई, बल्कि तत्कालीन परदे पर उनकी प्रतिद्वंद्वी श्रीदेवी के साथ भी, जिनके साथ उन्होंने लगभग एक दर्जन फ़िल्मों में अभिनय किया है। उनकी तेलुगू फ़िल्म 'देवता' (फ़िल्म) (1982) का, जिसमें उन्होंने दो बहनों की भूमिकाएं निभाईं, जो एक दूसरे के लिए बड़ा बलिदान करती हैं, हिट हिंदी फ़िल्म 'तोहफ़ा' (1984) के रूप में पुनर्निर्माण किया गया। इन फ़िल्मों ने जयाप्रदा को परंपरागत रूढ़िवादी वर्ग के सिनेमाप्रेमियों का चहेता बना दिया। यह एक ऐसी छवि थी, जो उस समय अच्छी तरह से काम आई, जब उन्होंने एक राजनीतिज्ञ के रूप में अपना नया कॅरिअर शुरू किया। 2002 में, उन्होंने फ़िल्म 'आधार' में एक अतिथि भूमिका के ज़रिए मराठी फ़िल्म उद्योग में क़दम रखा। अब तक, उन्होंने सात भाषाओं में काम किया है और अपने 30-वर्षीय फ़िल्म करिअर के दौरान 300 फिल्मों को पूरा किया है। 2004 में उन्होंने परिपक्व भूमिकाएं निभानी शुरू की। वह चेन्नई में जयाप्रदा थियेटर की मालकिन भी हैं।
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जया प्रदा
जयाप्रदा को 1994 में उनके पूर्व साथी अभिनेता एन.टी. रामराव ने तेलुगू देशम पार्टी में प्रवर्तित किया। बाद में उन्होंने रामराव से नाता तोड़ लिया और पार्टी के चंद्रबाबू नायडु वाले गुट में शामिल हो गईं। सन् 1996 में उन्हें आंध्र प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने के लिए राज्य सभा में मनोनीत किया गया।
पार्टी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू के साथ मतभेदों के कारण, उन्होंने तेदेपा को छोड़ दिया और समाजवादी पार्टी में शामिल हो गईं तथा सन् 2004 के आम चुनावों के दौरान रामपुर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा और सफल रहीं। उन्हें लोकसभा चुनाव के अपने अभियान के दौरान, रामपुर स्वर इलाक़े की महिलाओं को बिंदी वितरण द्वारा आचार संहिता का उल्लंघन करने के लिए, निर्वाचन आयोग द्वारा एक नोटिस जारी किया गया। 11 मई 2009 को, जयाप्रदा ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म ख़ान ने उनकी नग्न तस्वीरों का वितरण किया है। वे दुबारा 30,000 से भी ज़्यादा वोटों से चुनी गईं।
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