सभी स्लाटर हाउस अपना उत्पाद (पैकेट बंद मांस) विदेशों में निर्यात करते है हर महीने औसतन छह सौ करोड़ का व्यापार होता है। दूसरे प्रदेशों से मवेशी उत्तर प्रदेश में लाने पर प्रतिबंध के बाद बुधवार और गुरुवार को मवेशियों की आवक कम रही।
एक स्लाटर हाउस के मैनेजर नीरज त्रिवेदी ने बताया कि डॉक्टरों की टीम मवेशियों का स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद ही स्लाटरिंग की जाती है। हालांकि दूसरे प्रदेशों से मवेशी लाने पर लगी रोक से आवक कुछ कम हुई है। लेकिन अभी इसका कोई असर नहीं पड़ रहा है, क्योंकि कोविड के बाद चीन पर निर्यात पर लगी रोक से लगभग पचास फीसदी उत्पादन किया जा रहा है।
प्रभावित होगा चमड़ा उद्योग
स्लाटर हाउसों में स्लाटरिंग कम होने पर चमड़ा उद्योग के लिए कच्चे माल (खाल) की कमी होगी। इससे चर्म उद्योग भी प्रभावित होगा। चर्म उत्पाद निर्यातक मो. ताज आलम ने बताया कि चमड़ा उद्योग, स्लाटर हाउसों पर ही निर्भर है। अगर स्लाटरिंग कम हुई, तो इसका असर चमड़ा उद्योग पर पड़ेगा।