कानपुर। गाँव में नमक रोटी ही मिले तो कहकर जिंदा रह लेंगे, पर कभी शहर नहीं जायगे। शहर में तड़क भड़क वाली जिंदगी से अच्छा है गाँव। लॉक डाउन ने इसका एहसास करा दिया। यह कहना है गोंडा निवासी आसिफ का। वह पुणे से अपने साथियों आजम, मुवीन, जमाल, सिराज सहित सात दोस्तों के साथ पैदल लौट रहा था। रविवार को तपती दुपहरी में उसने रामादेवी में बताया कि वे महाराष्ट्र से मध्यप्रदेश होते हुए अपने प्रदेश में आ पाए हैं। एक हजार किलोमीटर से ज्यादा पैदल चल चुके हैं। रास्ते में किसी वाहन चालक को तरस आता तो बैठा लेता था, फिर पैदल ही आगे बढ़ना पड़ता है। मोबाइल कु बैटरी खत्म होने से परेशान परिजनों से बात भी नहीं हो पा रही है।