केस: एक
हरिजन कॉलोनी, सर्वोदयनगर निवासी शुभम कुमार के पुत्र राजू ने आसरा आवास के लिए आवेदन किया था। आवेदन की जांच में पता चला कि पिता शुभम सरकारी नौकरी करते हैं।
केस: दो
काकादेव निवासी शुभम कुमार पुत्र हरीमोहन के घर पर टीम जांच करने पहुंची तो पता चला कि पिता नगर निगम में नौकरी करते हैं। पक्का मकान पहले से बना है।
केस: तीन
एलनगंज निवासी खुशबू कश्यप पति बाबू राम कश्यप ने आवास के लिए आवेदन किया था। टीम जब जांच करने पहुंची तो पता चला कि यहां पर इस नाम की कोई महिला रहती ही नहीं है।
केस: चार
श्यामनगर निवासी रीतू पत्नी प्रशांत कुमार ने आसरा आवास योजना के तहत आवेदन किया था। टीम ने जांच में पाया कि उनका खुद का पक्का मकान है। पति प्राइवेट नौकरी करते हैं।
14 हजार आवेदन पत्रों की जांच लेखपालों से कराई गई थी। करीब 10 हजार आवेदक अपात्र पाए गए हैं। उन लोगों के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। करीब 4000 आवेदनों की लाॅटरी निकालकर चयनितों को आवास दिया जाएगा। -तेज प्रताप सिंह, परियोजना अधिकारी, डूडा