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वट सावित्री व्रत 22 को, सोशल डिस्टेंसिंग का रखें ध्यान

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कानपुर। राहुल शुक्ला -------------- वट सावित्री व्रत पति की लंबी आयु के लिए विवाहित महिलाओं के द्वारा रखा जाता है। इस बार वट सावित्री व्रत 22 मई को है। हिन्दू पंचांग के अनुसार यह व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि के दिन रखा जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं वट (बरगद) वृक्ष की पूजा करती हैं। हिंदू आस्था के अनुसार बरगद का वृक्ष पूजनीय है। ज्योतिषाचार्य प्रीति अग्निहोत्री और ज्योतिषाचार्य स्वाति सक्सेना ने बताया कि महिलाओं के द्वारा वट सावित्री व्रत त्रयोदशी से तिथि से ही प्रारंभ हो जाता है। हालांकि कुछ महिलाएं केवल अमावस्या के दिन ही यह व्रत करती हैं। इस दिन वट वृक्ष की पूजा के साथ-साथ सावित्री सत्यवान की पौराणिक कथा को भी सुना जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, कहा जाता है कि सावित्री ने वट वृक्ष के नीचे ही अपने मृत पति सत्यवान को जीवित किया था। इसलिए इस व्रत का नाम वट सावित्री पड़ा। ---------- बरगद के पेड़ की ही पूजा का महत्व वट सावित्री व्रत में बरगद के पेड़ का महत्व अधिक है। सनातन संस्कृति में ऐसा माना जाता है कि बरगद के पेड़ पर ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवताओं का वास होता है। इस दिन विवाहित महिलाएं वट वृक्ष पर जल चढ़ाकर उसमें कुमकुम अक्षत लगाती हैं। पेड़ में कच्चा सूत लपेटा जाता है। एकदम विधि-विधान के साथ वट वृक्ष की पूजा की जाती है। ऐसा करने से उन महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। --------------- सोशल डिस्टेंसिंग का रखना होगा ध्यान कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए वट सावित्री व्रत में महिलाओं को सोशल डिस्टेंसिंग का विशेष ध्यान रखना होगा। कारण है किस शहर में गिने-चुने स्थानों पर ही बरगद के पेड़ है जिसमें महिलाएं बड़ी संख्या में पूजा करने पहुंचती हैं। इसलिए जिला प्रशासन को इस ओर विशेष ध्यान देना होगा अन्यथा ऐसा न हो पूजा के चक्कर में कहीं कोरोना संक्रमण का प्रभाव महिलाओं में न हो जाए।
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