नामांकन अनिवार्य हुआ, तो संख्या घटकर 15,759 हुई
यू-डायस पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों के मुताबिक विगत शैक्षणिक सत्र में जनपद में 141 मदरसों में 25,944 विद्यार्थी थे। जब आधार से नामांकन अनिवार्य हुआ तो इनकी संख्या घटकर 15,759 हो गई। मतलब यह कि 10,185 विद्यार्थियों का कोई अता-पता नहीं है। यही वजह है कि इनका ब्योरा आधार कार्ड से नहीं जोड़ा जा सका है।
केस-1
शाहाबाद में मदरसा ए ऐरा नेकोजई में संचालित है। यू-डायस पोर्टल की रिपोर्ट के मुताबिक यहां गत शैक्षिक सत्र में 311 विद्यार्थी थे, लेकिन जब आधार की अनिवार्यता हुई तो 289 विद्यार्थियों का कोई ब्योरा ही नहीं मिला। महज 22 विद्यार्थियों का ब्योरा आधार से जोड़कर अपलोड किया गया।
केस-2
मदरसा जामियां अनवारुल उलूम बंदरहिया में गत शैक्षिक सत्र में 248 विद्यार्थी थे। आधार की अनिवार्यता हुई, तो 218 विद्यार्थियों का ब्योरा ढूंढे नहीं मिल रहा। यू डायस पोर्टल की बुधवार की रिपोर्ट के मुताबिक यहां महज 30 विद्यार्थियों का ही आधार लिंक हुआ है।
3.60 करोड़ रुपये का एक साल में हुआ फर्जीवाड़ा
जनपद में छात्रों का ब्योरा आधार से जोड़ा गया, तो मदरसों के दस हजार से अधिक छात्र कम या यूं कहें गुम हो गए। अब बड़ा सवाल यह है कि इनकी छात्रवृत्ति आखिर किसके खातों में जा रही थी। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से जुड़े सूत्र बताते हैं कि शैक्षिक सत्र 2021-22 तक मदरसों में पढ़ने वाले 23299 छात्रों को छात्रवृत्ति दी जा रही थी।
इन्हीं छात्रों का नहीं मिल रहा है कोई ब्योरा
प्रतिमाह तीन सौ रुपये के हिसाब से छात्रवृत्ति दी जाती है। मतलब यह कि एक विद्यार्थी को एक वर्ष में 3600 रुपये छात्रवृत्ति मिलती रही है। अगर आंकड़े जुटाएं, तो दस हजार विद्यार्थियों को एक वर्ष में तीन करोड़ 60 लाख रुपये छात्रवृत्ति भेजी गई और अब इन्हीं विद्यार्थियों का कोई ब्योरा नहीं मिल रहा है।
फर्जीवाड़ा रोकने के लिए ही पूरा ब्योरा आधार से जोड़ा जा रहा है। सैंपल के तौर पर कुछ मदरसों की जांच कराएंगे। फर्जीवाड़ा मिला तो जांच होगी। -एमपी सिंह, डीएम