रसोइया काजुल उन्हें गिनती पढ़ा रहीं थीं। पूछे जाने पर शिक्षा मित्र ने बताया शिक्षक हैं नहीं। यहां तीन रसोइयां हैं। इनमें काजुल और शीतल इंटर पास हैं। यह बच्चों को पढ़ाने में मदद करतीं हैं। नगर के अधिकांश स्कूलों का यही हाल है। अक्सर शिक्षक समय से नहीं पहुंच पाते हैं।
शिक्षक बोले- कैसे समय पर पहुंचे
उनका कहना है पांच-पांच स्कूलों का जिम्मा है, तो कैसे समय पर पहुंचे। मोहल्ला काजम खां के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में शुक्रवार सुबह बच्चे शिक्षक के आने का इंतजार करते देखे गए। इसके बाद में जब शिक्षक पहुंचे, तो स्कूल का ताला खुल सका।
नगर शिक्षा अधिकारी राजनारायण कुशवाहा ने बताया कि वे खुद बच्चों का पढ़ाने का काम कर रहे हैं। शिक्षकों की कमी है। बीआरसी के शिक्षकों को नगर में तैनात नहीं किया जा सकता है। अब जैसे भी व्यवस्था चल रही है, उसे चलाया जा रहा है।