फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kannauj News: दो घंटे की बारिश, 12 डिग्री सेल्सियस तापमान कम

Fri, 26 May 2023 11:39 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
विज्ञापन
विज्ञापन
कन्नौज। पिछले कई दिनों से भीषण गर्मी का सामना कर रहे लोगों को पिछले 24 घंटे में बारिश से राहत मिली है। शुक्रवार की भोर में दो घंटे की तेज बारिश से तापमान तेजी से लुढ़क गया। 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास का तापमान शुक्रवार को 28 डिग्री सेल्सियस पर आ गया।
विज्ञापन

मौसम विभाग की ओर से पहले से ही यह पूर्वानुमान जताया गया था कि 25 मई के बाद बारिश हो सकती है। उसी के तहत गुरुवार की देर तेज हवा चली। सुबह से आसमान पर बादल छाए रहे। पिछले दिनों के मुुकाबले ठंडी हवा चलने से लोगों ने गर्मी से राहत ली। दोपहर तक मौसम पूरी तरह से खुशनुमा बना रहा। इससे सड़क से लेकर बाजार तक में रौनक दिखाई पड़ी। दोपहर बाद से आसमान साफ हुआ और सूरज की तेज चमक ने फिर से तापमान का ग्राफ बढ़ाना शुरू किया। हालांकि दिन के शुरू में गर्मी न रहने से तापमान से राहत मिली।
-
मक्का को फायदा, टमाटर को नुकसान
शुक्रवार की सुबह जोरदार बारिश से फसल पर अलग-अलग असर पड़ा है। गर्मी में सिंचाई के बिना मुरझा रहे मक्का की फसल को संजीवनी मिली है। जबकि टमाटर, तरबूज, खारी-ककड़ी की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। मक्का के किसानों को खुशी है कि बिजली के संकट के बीच उनकी फसल की कुदरती तौर पर सिंचाई हो गई है।
विज्ञापन

-
तपती धरती पर राहत की फुहार, किसानों के खिले चेहरे
तालग्राम। तपती धरती पर शुक्रवार सुबह को हुई राहत की फुहार से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। मक्का, मूंगफली और जायद की फसलों को संजीवनी मिल गई है। बीते 15 दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी के कारण इलाके के ताल तलैया सूख जाने के साथ ही भूगर्भ जलस्तर भी काफी नीचे चला गया है। ऐसे में कम गहराई वाले निजी हैंडपंप सूख जाने से लोगों को पेयजल के परेशानी उठानी पड़ रही थी। शुक्रवार की सुबह बरसात ने लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत दिलाने के साथ ही खेतों में कुछ हद तक खड़ी फसलों को राहत मिली है। किसान बीरेंद्र कुमार, कुलदीप, सरोज, सहदुल्ल, मजीद ने बताया कि बरसात से मक्का, ज्वार बाजरा, मूंगफली व सब्जियों सहित जायद की खेती करने वाले किसानों के लिए राहत की फुहार बनी है । तपती धरती के कारण खेतों की नमी बनाए रखने के लिए किसानों को हर तीसरे दिन खेतों में पानी लगाना पड़ रहा था। बरसात के बाद खेतों में नमी आ जाने के कारण गेहूं, सरसों आदि फसल काटने के बाद खाली पड़े खेत की जुताई और धान नर्सरी की तैयार में किसानों को सहूलियत मिलेगी।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें