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Kannauj News: युवाओं ने संभाल रखी है कविता की विरासत

Tue, 21 Mar 2023 12:56 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
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कन्नौज। ऐसे समय में जब युवा पीढ़ी साहित्य से दूर होकर मोबाइल की दुनिया में सैर-सपाटा कर रही है, यहां के कई युवा ऐसे भी हैं जो कविता की विरासत को बखूबी संभाले हुए हैं। इत्रनगरी में पहले से ही कई नामचीन कवि हुए हैं। उस पीढ़ी के बाद नई पीढ़ी में कई ऐसे युवा चेहरे हैं जो काव्य मंच की शोभा बढ़ा रहे हैं। उनकी रचना उनकी प्रतिभा बयां कर रही है। उन्हें अपने शहर के अलावा बाहर से भी रचना को श्रोताओं के सामने रखने का न्योता मिलता रहता है। ऐसे ही कुछ युवा कवियों की रचनाओं से जुड़ी पेश है यह रिपोर्ट।
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शहर के मकरंदनगर रोड के रहने वाले युव कवि कुमार विवेक बताते हैं कविता लिखने का शौक उन्हें कम उम्र से ही है। आसपास होने वाले काव्य कार्यक्रम में शामिल होने से उनमें भी कविता लिखने की ललक जगी। अब उनकी रचना को लोग पसंद करने लगे हैं। कहा कि कविता कलेवर के पुनर्गठन की आवश्यकता है। कविता को, लोग क्या सुनना चाहते, क्या पढ़ना चाहते हैं के पूर्वाग्रह से हटकर वास्तविक समाज का सच्चा दर्पण बनकर सबके सामने आना चाहिए।

सिंहवाहिनी रोड मकरंदनगर निवासी युवा कवि प्रियांशु तिवारी भी नई पीढ़ी में काव्य मंच की पहचान बनकर उभरे हैं। उनकी रचनाएं भी लोगों को पसंद आती हैं। वह अपनी रचना, फंसा है नफरतों के इस अजब तूफान में भारत, सियासी रंग में फंसकर बड़े नुकसान में भारत के माध्यम से देश के हालात पर चिंता जताते हैं तो तालियों से शाबाशी मिलती है।
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सदर ब्लॉक के मिश्रापुर गांव के रहने वाले युवा कवि देवेंद्र देव भी नई पीढ़ी की नुमाइंदगी कर रहे हैं। वह कहते हैं कि कविता ही वह माध्यम है तो समाज को सही दिशा दिखाती है। अपनी रचना, बूढ़े बरगद की तरह, हैं बूढ़े मां-बाप।छाया हमको दे रहे, खुद सहते हैं ताप के माध्यम से वह परिवार और समाज को संदेश भी देते हैं।

मकरंद नगर में काली मंदिर के निकट रहने वाले युवा कवि पुष्पेंद्र शर्मा को भी उनकी रचनाओं से अलग पहचान मिली है। नई पीढ़ी के कवियों में उनकी सराहना होती है। वह मंच से सामाजिक ताने-बाने पर अपनी रचना के माध्यम से जनजागरण करते हैं। उनकी रचना जिस माता के ख़ून का,तुम हो पावन रूप, आंचल तुमको दे दिया, ओढ़ी वर्षा धूप। से परिवार में माता-पिता के महत्व पर जोर देते हुए दिखते हैं।
कुतुलूपुर निवासी अरविंद बाजपेई भी काव्य मंच पर नई पीढ़ी की नुमाइंदगी करते हुए दिखते हैं। वह वीर रस की अपनी रचनाओं से देशभक्ति की भावना जगाने की कामयाब कोशिश करते हुए दिखते हैं। उनकी रचना, जिसने कलम नही बेंची, उन हाथों का अभिनन्दन है। जिसने काव्य सुधा वर्षायी, उनका शत-शत वन्दन है। जिसमे मातृभूमि यश दिखता, शब्द नहीं वह चंदन है। बलिवेदी पर शब्द सुमन, जो चढ़ा काव्य वह नन्दन है। को खूब पसंद किया जाता है।
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