कन्नौज। निराश्रित गोवंशों व अस्थाई गोशालाओं की हकीकत परखने आए जिले के नोडल अधिकारी व विशेष सचिव कृष्ण कुमार गुप्ता तीन दिवसीय दौरे के बाद शनिवार को चले गए। बताया जा रहा है कि निरीक्षण के दौरान उनको अन्य जिलों से यहां के हालात अच्छे लगे हैं। यह बात अलग है कि धरातल पर अन्ना मवेशियों की समस्या जस की तस है।
पांच अप्रैल को माध्यमिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव कृष्ण कुमार गुप्ता ने कन्नौज जिले में दस्तक दी थी। उन्होंने कई गोशालाओं का भी निरीक्षण किया था। कुछ गोशालाओं में सुधार के लिए भी कहा था। हालांकि सड़कों पर घूमकर हादसों को बढ़ाने व खेतों में फसल को नुकसान पहुंचाने वाले अन्ना मवेशियों के बारे में उन्होंने कुछ नहीं कहा। न ही ऐसा कोई बयान सार्वजनिक हुआ। मुख्यमंत्री ने एक अप्रैल को नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि समय समाप्त होने के बाद भी शत-प्रतिशत मवेशी पकड़ने की रिपोर्ट पशु पालन विभाग ने नहीं दी है। इसके बाद ही जिलों में नोडल अधिकारी भेजे गए थे।
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समस्या नंबर एक
कन्नौज बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रामभजन सिंह पाल ने तहसील सदर में शिकायती पत्र देकर कहा है कि ग्राम पंचायत टिढि़यापुर के आसपास और सहिल्लापुर व गंगधरापुर में मवेशी खुले में घूमते हैं। शासन व प्रशासन की ओर से इनको पकड़वाया नहीं गया है। अन्ना मवेशी इन दिनों मक्का की फसल को उजाड़ रहे हैं। किसान रात-रात भर जाग रहे हैं। पूर्व अध्यक्ष का तर्क है कि पूर्व में भी डीएम को शिकायती पत्र दिया था, लेकिन सुनवाई नहीं हुई है।
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समस्या नंबर दो
नजरापुर। किसान उमेश, दिलीप, महेश कुमार, पप्पू पल और मानसिंह ने बताया कि भुगैतापुर, खुरदैया, बेहरिन, रतापुर्वा, फगुआ, भुड़िया, अर्जुनपुर्वा, जसपुरापुर सरैया, परसपुर, अटारा, जसनीपुर्वा, खजुआ, गूरा व विसंधुआ आदि गांव में खुले में घूमने वाले मवेशी मक्का को अधिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। मजबूर होकर रस्सी व तार खरीदकर फसलों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। उसके बाद भी अन्ना पशु फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
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जो भी मवेशी रह गए हैं, उनको पकड़ने का प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही सभी निराश्रित जानवर संरक्षित किए जाएंगे। अन्य जिलों से कन्नौज के हालात अच्छे हैं। किसान ही मवेशियों को छोड़ देते हैं। पड़ोसी जिलों से भी मवेशियों का झुंड आ जाता है।
आरएन सिंह, सीडीओ
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फोटो -03 - थाना परिसर में घूमते छुट्टा गोवंश। संवाद
देख लो भइया, सड़कों पर घूम रहीं गइयां...
तालग्राम। छुट्टा गोवंश अब खेतों और सड़कों से होते हुए सरकारी कार्यालयों तक पहुंच गए हैं। तालग्राम थाना परिसर में ही गोवंशों का डेरा जमा हुआ है, लेकिन जिम्मेदार बेपरवाह हैं।
खास बात यह है कि इस निर्देश के बाद भी खुले में अन्ना मवेशी घूम रहे हैं। मुख्यमंत्री का छुट्टा गोवंशों को संरक्षित करने का अल्टीमेटम समाप्त हो चुका है। नोडल अधिकारी व माध्यमिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव कृष्ण कुमार गुप्ता और संयुक्त निदेशक पशुपालक पैथालॉजी के डॉ. देवेद्र सिंह ने पांच अप्रैल को तालग्राम गोशाला का निरीक्षण किया था। सख्त हिदायत के बाद दो दिन गुजर चुके हैं, लेकिन थाना व सड़कों पर भूखे-प्यासे आवारा गोवंश घूम रहे हैं। शनिवार को थाना परिसर में ही गोवंश घूमते नजर आए। लेकिन इन गोवंशों को गोशाला भेजने के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए है। नगर पंचायत अधिशासी अधिकारी और खंड विकास अधिकारी को इसकी कोई चिंता नहीं है। इसी का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। दलापुर्वा गांव निवासी सुनील कुमार का कहना है कि बाजार में सब्जी खरीदने आते हैं, तो यहां कई मवेशी पॉलिथीन खाती हुई मिलती हैं। कुडरी गांव निवासी दीवान का कहना है कि कस्बा से लेकर गावों में जगह-जगह गाय सड़कों पर घूमती हैं, अधिकारी इन पर ध्यान नहीं देते। बीडीओ मनोज कुमार का कहना है कि गोशालाओं का निर्माण चल रहा है। निर्माण पूरा कराकर पशुओं को वहां रखा जाएगा। साथ ही जो गोशालाएं संचालित हैं, उनका लगातार निरीक्षण कर पशुओं को संरक्षित किया जाएगा।