कन्नौज। पाला और सर्दी से लगातार फसलों को नुकसान हो रहा है। इसलिए फसल को बचाने के लिए कृषि वैज्ञानिक किसानों को बचाव के तरीके बताकर जागरूक कर रहे हैं। ताकि फसल में होने वाले नुकसान से बचा जा सके।
कृषि रक्षा अधिकारी अविशांक सिंह चौहान ने बताया कि पाला पड़ने की संभावना होने पर रात में आठ से 10 बजे सर्द हवा आने वाली दिशा में खेत की मेड़ पर कूड़ा डालकर जला दें। आग जलने पर उस पर नीम की पत्तियां डालकर धुआं करें, जो फसलें पंक्तियों में बोई गई हैं, उनकी पंक्तियों में धुआं प्रवेश करें। इसका ध्यान रखें और आठ से 10 फीट के अंतर से यही विधि अपनाकर धुआं कर दें। इस प्रकार फसल का तापमान कुछ हद तक नियंत्रित होगा तथा नीम कीटनाशक गुण भी देगी।
टपक और स्प्रिंकलर से करें सिंचाई
जिन खेतों में टपक सिंचाई और स्प्रिंकलर सिंचाई की सुविधा हो, वहां सुबह फसलों पर गर्म पानी की बौछार मारी जाए तो ही पाले से बचाव होता है। साथ ही पाले की संभावना के समय की फसलों में हल्की सिंचाई करने से जमीन में नमी रहती और भूमि का तापमान एकदम कम नहीं होता है। इससे शीतलहर और पाले से फसल की सुरक्षा हो जाती है, सिंचाई से मृदा का तापमान 0.5 डिग्री से 02 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है।
एक हजार लीटर पानी में घोलकर एक लीटर गंधक के तेजाब का करें छिड़काव
फसलों पर पाला की संभावना अधिक से उन दिनों गंधक के तेजाब का 0.1 प्रतिशत घाेल का छिड़काव करें। इसके लिए एक लीटर गंधक के तेजाब को एक हजार लीटर पानी में घोलकर एक हेक्टेयर क्षेत्र में डालें। ध्यान रहे कि यह फुहार फसल पर अच्छी तरह से पड़े। इसका असर दो हफ्तों तक रहता है और यदि इस अवधि के बाद भी पाले का संभावना हो तो लगातार दोहराव भी करते रहें।
थायो यूरिया एक ग्राम प्रति दो लीटर पानी में फसलों पर छिड़काव करें
सरसों, गेहूं, चना, मटर में इस छिड़काव से पाला बचाव के साथ ही पौधे में लौह तत्व की जैविक व रसायनिक सक्रियता बढ़ जाती है। इससे पौधों की रोग प्रतिरोधकता बढ़ाने के साथ ही जल्दी पकने में सहायता भी करती है। फसलों पर थायो यूरिया एक ग्राम प्रति दो लीटर पानी में फसलों पर छिड़काव करें तथा इसे आवश्यकतानुसार दोहराया भी जा सकता है। दीर्घकालीन उपायों के रूप में खेत का उत्तर-पश्चिमी दिशा में वायु अवरोधक पेड़ जैसे शीशम, खेजड़ी, शहतूत, बबूल, जामुन आदि लगाए जा सकते हैं, जो पाले, ठंडी हवाओं को रोककर फसल को सुरक्षा देते हैं।