कन्नौज। स्कूली वाहनों में ढेरों कमियां हैं। उनके लिए नियम ताक पर हैं, लेकिन जिम्मेदार बेपरवाह हैं। नियमावली के तहत स्कू्ली बच्चों को ले जाने वाला वाहन 40 किमी प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार नहीं भर सकता है, लेकिन कई वाहन निर्धारित रफ्तार से अधिक दौड़ते हैं।
नए शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर रिजल्ट जीरो है। साढ़े तीन महीने गुजर जाने के बाद भी अफसरों ने जरूरी नहीं समझा कि अभियान चलाकर स्कूली वाहन चेक किए जाएं। देखें, कि वाहनों में नियमों का कितना पालन हो रहा है। नियम ताक पर रखकर फर्राटा भर रहे वाहनों को लेकर अफसरों व जिम्मेदारों की आंखें भी तभी खुलती हैं, जब एटा की तरह स्कूली वाहन जैसा कोई बड़ा हादसा होता है। यह अभियान कुछ दिनों तक चलता है, उसके बाद फिर सब पुराने ढर्रे पर आ जाता है। एआरटीओ कार्यालय में कुल 509 वाहन पंजीकृत हैं, इनमें से कई ऐसे वाहन हैं, जो नियम विरुद्ध हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सब शांत हैं। स्कूली वैनों में सीट बेल्ट का पालन तो कतई नहीं किया जा रहा है। न ही ज्यादातर वाहनों में फस्ट एड बॉक्स नजर आते हैं। उत्तर प्रदेश मोटरयान 26वां संशोधन नियमावली 2019 का कतई पालन नहीं हो रहा है।