कन्नौज। हाईकोर्ट ने गबन के आरोप में जेल गए प्रधानाध्यापक की ओर से वेतन मांगने की अपील को खारिज कर दिया है। उनकी मांग को बीएसए ने मानने से इंकार कर दिया था। ऐसे में पूर्व प्रधानाध्यापक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने बीएसए को तलब कर जानकारी मांगी थी। बीएसए की ओर से नियामली का हवाला देकर जवाब पेश करने के बाद कोर्ट ने मांग को खारिज कर दिया। बीएसए ने बताया कि पूर्व प्रधानाध्यापक गबन के आरोप से बरी हो चुके हैं, लेकिन जेल में बिताए समय का वेतन जारी नहीं हो सकता है।
मामला उमर्दा ब्लॉक के भखरौली स्थित जूनियर हाईस्कूल से जुड़ा है। वहां के पूर्व प्रधानाध्यापक बालकृष्ण श्रीवास्तव पर भवन निर्माण के दौरान गबन का आरोप लगा था। इस पर उनके खिलाफ तत्कालीन बीएसए हरी सिंह शाक्य ने तीन जून 2009 को एफआईआर दर्ज कराई गई थी। इसी के मद्देनजर बालकृष्ण श्रीवास्तव 22 फरवरी 2012 से 16 अक्टूबर 2012 तक जेल में रहे। जेल से छूटने के बाद सात जून 2013 को उन्हें सवेतन बहाल कर दिया गया। रिटायर होने के बाद उन्होंने विभाग से मांग की गई जेल में बिताई अवधि का वेतन जारी किया जाए। विभाग ने नो वर्क-नो पे सिद्धांत के आधार पर निरस्त कर दिया। तब उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वहां बीएसए को तलब किया गया। बीएसए कौस्तुभ सिंह ने विभाग की तरफ से जवाब दाखिल करते हुए नियम का हवाला दिया। बताया कि विभाग में अब तक किसी को जेल अवधि का वेतन नहीं दिया गया है। हाईकोर्ट ने इसी आधार पर याचिका को खारिज कर दिया।