कन्नौज। चोरी के एक मामले में जेल में बंद आरोपी को पुलिस ने फिर से चोरी के ही आरोप में रिपोर्ट दर्ज कर ली। मामला कोर्ट में पहुंचा तो पुलिस की कारगुजारी सामने आ गई। पूरा साक्ष्य सामने आने पर कोर्ट ने न सिर्फ आरोपी को इस केस से बरी कर दिया, बल्कि पुलिस को भी फटकार लगाई। लीगल एड डिफेंस काउंसिल की पैरवी पर यह फैसला आरोपी के पक्ष में आया।
मामला तिर्वा कोतवाली से जुड़ा है। चीफ डिफेंस काउंसिल श्वेतांक अरुण तिवारी ने बताया कि तिर्वा कोतवाली पुलिस ने जेल में ही बंद एक आरोपी दिव्यांग सुलेमान को पुलिस ने चोरी के तीन अलग-अलग मामलों में भी आरोपी बना दिया। वह आरोपी 10 अक्टूबर 2012 से 27 नवंबर 2016 के बीच जिला जेल में निरुद्घ था। इसी बीच 2016 में ही 11 अक्तूबर से नौ नवंबर के बीच तिर्वा कोतवाली क्षेत्र में हुई चोरी की तीन अलग-अलग घटनाओं में उसे भी आरोपी बना दिया। वह जेल में ही बंद था। यह मामला लीगल एड डिफेंस काउंसिल के सामने लाया गया। चीफ डिफेंस काउंसिल ने दिव्यांग सुलेमान की निशुल्क पैरवी के लिए असिस्टेंट डिफेंस काउंसिल मोहम्मद सैफ व शिवशंकर दोहरे को नियुक्त किया। डिफेंस काउंसिल ने बंदी के मुकदमे से जुड़ी फाइल देखी तो पूरा मामला साफ हुआ। इसके बाद डिफेंस काउंसिल ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष यह तथ्य रखा गया। सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर न्यायाधीश परविंद्र सिंह ने पुलिस की ओर से आरोपी बनाए गए सुलेमान को निर्दोष सिद्ध करते हुए उन तीनों मामलों से बरी कर दिया। चीफ डिफेंस काउंलिस श्वेतांक अरुण तिवारी ने बताया कि इस मामले की सुनवाई करते हुए पूरा साक्ष्य देखने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट परविंद्र सिंह ने पुलिस विभाग पर सख्त टिप्पणी की। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने निर्णय करते हुए लिखा कि विवेचक उपनिरीक्षक विवेचक रामशरण सोनकर ने अपने अधिकारों को दुरुपयोग किया। उनके इस कृत्य से सुलेमान के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ। उन्होंने इसके लिए बाकायदा पुलिस महानिरीक्षक को आदेश की कॉपी भी भेजी है।