कन्नौज। गुरसहायगंज कोतवाली क्षेत्र के सरायदौलत में 10 जून को हुई हिंसा के मामले में पुलिस एक आरोपी की रिमांड के लिए कोर्ट पहुंची, पर पुलिस को अदालत में फजीहत का सामना करना पड़ा। आरोपी के खिलाफ सुबूत पेश न कर पाने पर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने रिमांड नामंजूर कर दी। सरायदौलत में रोडवेज बस से युवक की मौत के बाद आगजनी, पथराव व तोड़फोड़ हुई थी। जिसमें पुलिस ने 212 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। जिसमें 62 नामजद व 150 अज्ञात हैं। एक ही दिन में दो रिमांड नामंजूर होने पर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सरायदौलत कस्बबे में हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने केसराम को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। गुरुवर को पुलिस ने रिमांड के लिए न्यायालय के समक्ष पेश किया था। चीफ डिफेंस काउंसिल श्वेतांक अरुण तिवारी ने आरोपी की ओर से पैरवी की। कहा कि जिस युवक को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, एफआईआर में नामजद नहीं है। स्वतंत्र साक्षी ने भी बयान नहीं दिया कि उसने घटना को अंजाम दिया जबकि पुलिस ने फायरिंग की बात कही, लेकिन मौके से कारतूस व खोखा नहीं मिला था। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ज्योत्सना चौधरी ने दलीलें सुनने के बाद रिमांड को खारिज कर दिया।
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फोटो-07- एसपी कार्यालय के बाहर अपनी मांग को लेकर पहुंची महिलाएं। संवाद
परिजनों ने एसपी दफ्तर पहुंच लगाई न्याय की गुहार
कन्नौज। रायदौलत हिंसा के आरोपी के परिजन एसपी दफ्तर पहुंचे। परिजनों ने एसपी से न्याय की गुहार लगाते हुए कहा कि उसका पुत्र जितेंद्र 10 से 11 जून तक मैनपुरी जनपद के भोगांव थाना क्षेत्र के महादिया गांव में एक रिश्तेदार के घर जोत जागरण व भोज में शामिल होने गया था। घटना के वक्त पुत्र मौजूद नहीं था। गांव के राजनीतिक रंजिश के चलते पुत्र का नाम लिखवा दिया गया।पुलिस ने जांच कर कार्रवाई का भरोसा दिया है।