तिर्वा। मेडिकल कॉलेज में मरीजों के पंजीकरण के लिए पांच काउंटर खोल दिए गए हैं। इससे मरीजों का पर्चा समय पर बनाना शुरू हो गया है।
वायरल फीवर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। मेडिकल कॉलेज समेत अन्य अस्पतालों में मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। मेडिकल कॉलेज में सिर्फ दो काउंटरों होने के कारण मरीजों को घंटों लाइन में लगना पड़ती थी। एक मरीज को करीब तीन घंटे में दवा मिलती थी। अमर उजाला ने 27 अगस्त के अंक में बुखार बेकाबू, बदइंतजामी ने बढ़ाई मुश्किलें शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। प्राचार्य डीएस मार्तोलिया ने शनिवार को खबर का संज्ञान लिया। उन्होंने ओपीडी का निरीक्षण किया और तत्काल ओपीडी में पांच काउंटरों को खुुलवा कर मरीजों का पंजीकरण शुरू कराया। इससे मरीजों को राहत मिली। प्राचार्य ने बताया कि हर हाल में मरीजों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी।
पंजीकरण तो हुआ, लेकिन नहीं मिला उपचार
दवा लेने आए मरीज अभिषेक कुमार ने बताया कि दो दिनो से बुखार आ रहा है। सुबह नौ बजे मेडिकल कॉलेज आ गए थे। पर्चा तोे जल्दी बन गया, लेकिन डॉक्टर के पास मरीजों की भीड़ थी। इससे उन्हें उपचार नहीं मिल सका।
दो घंटे लाइन में पड़ा लगना
मरीज सत्यम कुमार ने बताया कि वह बुखार की दवा लेने के लिए मेडिकल कॉलेज आए है। पर्चा बनवाने के लिए आधा घंटे लाइन में लगना पड़ा। जबकि दो घंटे चिकित्सक से परामर्श लेने में लाइन में लगना पड़ा। लाइन मे लगना पड़ा। जिसके बाद उन्होंने डाक्टर को दिखाकर दवा ली है।