छिबरामऊ। ग्राम समाज की जमीन को सुरक्षित रखने वाले राजस्व प्रशासन की कर्मचारियों से साठगांठ कर डीएम के सेवानिवृत्त पेशकार ने बिना किसी प्रस्ताव के गांव समाज की बेशकीमती भूमि को अपनी पत्नी के नाम हस्तांतरित करा लिया। एसडीएम कोर्ट ने इस हस्तांतरण को अवैध बताते हुए खारिज कर दिया है। बता दें कि सेवानिवृत्त पेशकार करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीन की बिक्री भी कर चुका है।
खुबरियापुर रोड पर गांव सभा सरायदायमगंज की साल 1995 के राजस्व रिकार्ड में गाटा संख्या 273 व 274 की 54 डिसमिल भूमि राजस्व अभिलेखों में ग्राम समाज में दर्ज थी। इसी जमीन से सटी हुई गाटा 333 की 26 डिसमिल जमीन तत्कालीन एसडीएम के पेशकार लज्जाराम बाथम आदि के नाम पर दर्ज थी। राजस्व महकमे में अपनी पहुंच का फायदा उठाते हुए लज्जाराम ने राजस्व कर्मियों से सांठगांठ कर बिना गांव सभा के प्रस्ताव व अनुमति के गांव समाज की बेशकीमती जमीन को अपनी जमीन से हस्तांतरित करा लिया।
बाद में इस जमीन को लज्जाराम आदि ने बिक्री कर दिया। बिना प्रस्ताव के हुई हस्तांतरण प्रक्रिया के विरोध में पूर्व प्रधान ने न्यायालय में वाद दायर किया। मजे की बात यह है कि गांव समाज की जमीन के अवैध हस्तांतरण के मुकदमे सरकारी मशीनरी ने तीन बार खारिज भी कर दिया। गुरुवार को एसडीएम उमाकांत तिवारी ने इस मुकदमे में फाइनल सुनवाई करते हुए हस्तांतरण आदेश को निरस्त कर दिया। एसडीएम ने बताया कि हंस्तारण के बाद अब तक ही दोनों जमीनों पर लज्जाराम की पत्नी व खरीदार ही काबिज हैं। एसडीएम के पेशकार रहते हुए इस फर्जीवाडे़ को अंजाम देने वाले लज्जाराम डीएम कन्नौज के पेशकार पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।