कन्नौज। एक हजार साल पहले कन्नौज के शासक रहे राजा जयचंद को महाशिवरात्रि पर उनकी जयंती पर याद किया गया। इस दौरान वक्ताओं ने उन्हें यशस्वी, प्रतापी और योद्धा की संज्ञा देते हुए गद्दार कहने वालों को गलत साबित किया। मुख्य अतिथि पूर्व सांसद और आगरा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ओमपाल सिंह निडर ने भी उनकी शान में कसीदे पढ़े।
शहर की सामाजिक संस्था कान्यकुब्ज शिक्षा एवं समाज सेवा समिति की ओर से आयोजित महाराजा जयचंद स्मृति समारोह में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। सबसे पहले तो जयचंद टीला के पास ही स्थित राजा जयचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। आयोजन समिति के संयोजक नवाब सिंह की अगुआई में कार्यक्रम स्थल पर वक्ताओं ने बारी-बारी से राजा जयचंद के समर्थन में बात रखी और उन्हें गद्दार कहने और प्रचारित करने वालों को ही गलत साबित किया।
मुख्य वक्ता के रूप में आए पूर्व सांसद और प्रोफेसर ओमपाल सिंह निडर ने प्राचीन भारतीय इतिहास के आधार पर तमाम ऐतिहासिक साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए स्वीकार किया कि महाराज जयचंद को गद्दार साबित करने वाले कोई लिखित और प्रमाणित साक्ष्य नहीं हैं। केवल कुछ तथाकथित लोगों की ओर से जानबूझकर कर जनमानस में एक गलत और तथ्यहीन भ्रम फैलाया गया है। इससे कन्नौज की मिट्टी को कलंकित करने की कोशिश की गई है, यह स्वीकार योग्य नहीं है। कार्यक्रम अध्यक्ष प्रोफेसर सुशील राकेश शर्मा, पूर्व प्राचार्य डॉ. रामेंद्र बाबू चतुर्वेदी, प्रोफेसर लाल चंद्र शर्मा, अजीत राय, अनिल द्विवेदी तपन, डॉ. कृष्ण कांत दुबे, डॉ. अमरनाथ दुबे, राकेश यादव आदि वक्ता ने भी ने अपनी बात रखी। इस दौरान आयोजक नवाब सिंह यादव, अनुराग मिश्र, कार्यक्रम संयोजक दिनेश दुबे, डॉ. आरएन मिश्र, उमेश द्विवेदी, सुशील भारद्वाज, इंद्रेश यादव, नीलू यादव आदि मौजूद रहे।
आल्हा सुनकर फड़कीं भुजाएं
कार्यक्रम के दौरान कन्नौज के मशहूर आल्हा गायक संग्राम सिंह ने आल्हा गायन कर सभी को झूमने पर मजबूर कर दिया। आल्हा के माध्यम से उन्होंने कन्नौज की गौरवशाली व ऐतिहासिक परंपरा का बखान किया। बरेली से आईं आल्हा गायक काजल सिंह सहित संग्राम सिंह और रामशंकर आल्हा गायकों ने अंदाज में इतिहास को पेश किया। कार्यक्रम में कई स्कूलों के नन्हे मुन्नों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर मन मोह लिया।
आयोजक बोले, दाग धोने के लिए जारी रहेगा अभियान
मुख्य आयोजक नवाब सिंह यादव ने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल वर्ष में एक दिन कार्यक्रम करने से नहीं हो जाता, बल्कि हर समय हमारी जिम्मेदारी है कि राजा की गरिमा प्रदान करने के लिए तन-मन-धन से तैयार रहें। राजा पर लगे झूठे दाग को, हमारे स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाले लोगों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा।
पुस्तक का विमोचन
शहर के इतिहासकार प्रोफेसर सुशील राकेश शर्मा ने राजा जयचंद पर एक पुस्तक लिखी है। इस किताब को जहीर ललितपुरी ने अंग्रेजी में अनुवाद किया है। शुक्रवार को कार्यक्रम के दौरान इस पुस्तक का विमोचन किया गया।