तिर्वा। लगातार हो रही बारिश के बीच रविवार रात तिर्वा कोतवाली क्षेत्र के ललकियापुर गांव में कच्चा मकान गिरने से दो सगे भाइयों की दर्दनाक मौत से हर कोई सदमे में है। आवास न मिलने के गुस्से में लोगों ने सोमवार सुबह जटियायापुर मोड़ पर जाम लगा दिया। मुआवजे के आश्वासन के बाद जाम लोगों ने जाम खोला।
दरअसल ललकियापुर गांव निवासी रामसनेही का कच्चा मकान रविवार की रात बारिश में ढह गया था। इस हादसे में दो उसके दो बेटों आलोक व अवनीश की मौत हो गई थी। हादसे से गुस्साए लोगों ने सोमवार की सुबह तिर्वा-बेला मार्ग कस्बे के जटियायापुर मोड़ पर जाम लगा दिया। करीब तीन घंटे से अधिक जाम लगने से बड़े वाहनों समेत लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जाम की सूचना पर पहुंचे पुलिस ने समझाने का प्रयास कर जाम को खुलवाने की कोशिश करते रहे। लोग आवास न मिलने पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर हंगामा करते रहे। मौके पर पहुंची तहसीलदार नवनीता राय व नायब तहसीलदार रत्नेश श्रीवास्तव ने दोनों भाईयों की मौत के मुआवजा के रूप में दैवीय आपदा के तहत चार-चार लाख रुपये और आवास की मदद का आश्वासन दिया। उसके बाद समझाने पर लोगों ने बात पर सहमति जताते हुए जाम को खोल दिया। करीब तीन घंटे तक बाधित रहे मार्ग में फंसे लोगों ने राहत की सांस ली। जाम खुलने के बाद दोनों भाईयों के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
हादसे के बाद गुस्साए लोगों ने प्रधान व ग्रामसचिव की कार्यशैली पर खूब नाराजगी जताई। आरोप लगाया कि पात्र लोगों को आवास आवंटित करने के लिए ग्राम सचिव ने ग्रामसभा का निरीक्षण क्यों नहीं किया। आवास न मिलने पर प्रशासन की लापरवाही साफ दिख रही है। अब दो भाइयों की मौत के बाद परिवार को पक्का आवास देने का आश्वासन दिया गया है।
घटना घटने के बाद प्रशासन हरकत में आया और आनन-फानन में आवास समेत मुआवजा भी देने का एलान किया गया। लोगों के बीच चर्चा है कि पात्र होने के बाद भी आवास क्यों नहीं मिला था। गांव का प्रधान, ग्रामसचिव व अन्य अधिकारी समेत आखिर कौन जिम्मेदार है। लोगों में सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों को न मिल पाने का दोषी कौन है समेत अन्य आरोपों की चर्चाएं जोरों पर हैं।