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Kannauj News: दो भाइयों की मौत के मामले में प्रधान को नोटिस

Tue, 03 Oct 2023 01:01 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
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कन्नौज। पिछले महीने 10 सितंबर को उमर्दा के ललकियापुर में कच्चा मकान गिरने से हुई दो भाईयों की मौत मामले में प्रशासन की कार्रवाई और तेज हुई है। शुरुआती जांच के आधार पर ग्राम सभा के तत्कालीन सचिव को निलंबित किया जा चुका है। प्रधान की भूमिका पर भी सवाल खड़े हुए हैं। डीएम ने गांव के प्रधान को नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा है। तय समय में सही जवाब न आने पर कार्रवाई तय है।
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दरअसल पिछले माह बारिश के दौरान जिले में कई जगह कच्चे मकानों के गिरने की घटना हुई थी। कई लोग इसमें चुटहिल भी हुए थे। इसी कड़ी में बेहरा-गैसापुर के मजरा ललकियापुर निवासी रामसनेही का भी कच्चा मकान 10 सितंबर की शाम हुई बारिश में ढह गया था। इस हादसे में उनके दो पुत्रों आलोक व अवनीश की मौत हो गई थी।
इसमें कच्चा मकान होते हुए भी परिवार को अपात्र घोषित किए जाने की बात सामने आई थी। शुरुआती जांच में शिकायत सही पाए जाने पर तत्कालीन ग्राम सचिव को निलंबित कर दिया गया था। उसी के तहत बेहरा-गैसापुर के प्रधान की भी भूमिका संदिग्ध मिली थी। आरोप है कि पात्र होते हुए भी प्रधान की ओर से अपात्र करवा दिया गया था। इस मामले में डीएम की ओर से प्रधान को नोटिस भेजा है।
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प्रशासन की ओर से करवाई गई अब तक की जांच में सामने आया है कि दो साल पहले 15 जुलाई 2021 को ब्लॉक उमर्दा क्षेत्र की ग्राम पंचायत बेहरापुर गैसापुर में प्रधान महेंद्र सिंह की अध्यक्षता में खुली बैठक हुई थी। इस दौरान आवास प्लस की पात्रता सूची से 12 नाम काटे गए थे। जो 12 नाम काटे गए वह तो अपात्र ही मिले, लेकिन 12 वां नाम रामसनेही की पत्नी सुमन का था, जो कि योजना के लिए पात्र थीं, फिर भी नाम हटा दिया गया था।
इसी वजह से उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका था। इसी मामले में प्रधान की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। डीएम शुभ्रांत शुक्ल ने प्रधान को जारी किए कारण बताओ नोटिस में कहा है कि क्रमांक एक से 12 तक की सूची में क्रमांक 11 को छोड़कर सभी लोग अपात्र मिले हैं, जबकि क्रमांक 11 पर सुमन पत्नी रामसनेही का नाम था। उनका कच्चा व जीर्ण-शीर्ण हालत में घर मिला। ग्राम विकास अधिकारी अजय पाल और प्रधान महेंद्र सिंह ने जानबूझकर पक्का आवास बताकर अपात्र घोषित किया।


इस मामले में डीडीओ नरेंद्र देव द्विवेदी ने 15 सितंबर को ग्राम विकास अधिकारी अजय पाल को निलंबित कर दिया था। एक पक्ष की समय सीमा में डीपीआरओ के जरिए प्रधान से जवाब मांगा गया है। संतोषजनक उत्तर व साक्ष्य न होने पर पंचायत राज अधिनियम-1947 की धारा 95 (1) (छह) के तहत कार्रवाई होगी। डीपीआरओ राजेंद्र प्रकाश का तर्क है कि इस धारा में ग्राम पंचायत के लिए कमेटी गठित कर दी जाती और प्रधान से अधिकार ले लिए जाते हैं।
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