कन्नौज। अंध विश्वास के चलते दीपावली पर उल्लुओं की शामत आ जाती है। आखेटक इनका शिकार कर महंगे दामों में बिक्री करते हैं। शिकार की आशंका पर शासन के निर्देश पर वन विभाग अलर्ट हो गया और वन क्षेत्र में गश्त तेज कर शिकारियों नजर रखी जा रही है।
दीपावली पर धन और वैभव की देवी लक्ष्मी की पूजा का विधान है। उल्लू को देवी लक्ष्मी का वाहन माना जाता है। लोगों का अंध विश्वास है कि उल्लू का वध करने से लक्ष्मी घर में स्थिर हो जाती हैं। इस अंध विश्वास के चलते कुछ लोग दिवाली पर उल्लुओं का वध करते हैं। शिकारियों के जरिए उल्लू पकड़वा कर दिवाली की रात उनका वध करते हैं।
कुछ लोगों में भ्रम है कि देवी लक्ष्मी के वाहन उल्लू को मारने से वह वापस नहीं जा पातीं। इससे उनके घर में लक्ष्मी वास कर लेती हैं। जिला वन अधिकारी राकेश सिंह ने बताया कि जिले के जंगली इलाकों में वन विभाग की टीमें गश्त कर रही हैं। उल्लू व उल्लू की प्रजातियों का शिकार होने नहीं दिया जाएगा।
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चिरैयागंज और रपरा जंगल में वन रक्षकों ने डाला डेरा
कन्नौज। शहर का चिरैयागंज मोहल्ला पक्षियों का शिकार और तस्करी के लिए सदियों से चर्चित रहा। यहां रहने वाले अधिकांश आखेटक (चिड़ीमार) बड़े पैमाने पर चोरी छिपे दिल्ली, मुंबई समेत कई शहरों के नामी होटलों में प्रतिबंधित पक्षियों के मांस की आपूर्ति करते हैं। हाल में ही पुलिस ने डेढ़ क्विंटल प्रतिबंधित पक्षियों का मांस बरामद किया था। इससे वन विभाग की टीमों ने चिरैैयागंज, रपरा जंगल, लाख बहोसी पक्षी विहार इंदरगढ़, हसेरन, खैरनगर बबूल के जंगलों समेत कई स्थानों पर डेरा डालकर निगरानी शुरू की है।
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फोटो 02- ज्योतिषी पंडित कामनी प्रसाद शुक्ला।
महज अंधविश्वास, जीव-जंतु की हत्या से होता सर्वनाश
कन्नौज। ज्योतिषी पंडित कामनी प्रसाद शुक्ला का कहना है कि उल्लू का वध करने से देवी लक्ष्मी के ठहरने की बात महज अंध विश्वास है। कोई भी देवी देवता पशु, पक्षी व जीव क हत्या से प्रसन्न नहीं होते हैं। हत्या करने वाले व्यक्ति का सर्वनाश हो जाता है।