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25 साल से शोध न होने पर बढ़े मच्छर

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कन्नौज। मच्छरों पर अंकुश लगे तो कैसे, जिले में शोध के इंतजाम तक नहीं हैं। 25 साल बीतने के बाद भी कीट विज्ञानी और लैब की स्थापना नहीं हुई है। यही वजह है कि डेंगू, चिकनगुनिया, फाइलेरिया, मलेरिया फैलाने वाले मच्छरों की बड़ी फौज लोगों को मौत के मुंह तक ले जा रही है।
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मच्छर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए मलेरिया विभाग में कीट विज्ञानी की तैनात होती है। यह मच्छरों को पकड़ कर लैब में जांच करते हैं कि किस क्षेत्र में ज्यादा मच्छर हैं, इसकी वजह क्या है। कौन सी प्रजाति के हैं। ये कौन सी बीमारी कितनी फैला सकते हैं। जिससे मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों से बचाव किया जा सके। हैरान करने की बात यह है कि 1997 में फर्रुखाबाद से जनपद का सृजन होने के बाद से आजतक मच्छरों पर शोध नहीं हुआ। यहां 20 कर्मचारियों के स्टाफ में सिर्फ जिला मलेरिया अधिकारी और चार मलेरिया निरीक्षकों की तैनाती हैं।
कीट विज्ञानी, प्रयोगशाला तकनीकी, सहायक प्रयोगशाला तकनीकी, लिपिक और कम्प्यूटर ऑपरेटर के पद रिक्त चल रहे हैं। जिला अधिकारी शुभ्रांत शुक्ल ने बताया कि जिले में कीट विज्ञानी, प्रयोगशाला और कर्मचारियों की बढ़ोत्तरी के लिए शासन को पत्र भेजा जाएगा। अगले साल तक इंतजाम पूर्ण कर लिए जाएंगे।
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मादा मच्छर 70-80 लोगों को बनाती निशाना
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. इलाल अहमद खान ने बताया कि अलग-अलग इलाकों में मच्छरों की अलग-अलग प्रजातियां हैं। कई तरह के वायरस और पैरासाइट के माध्यम से अनेक बीमारियां फैलाते हैं। मच्छर तेजी से बढ़ते और काटते हैं। इसलिए ये मच्छर खतरनाक हैं। मादा मच्छर की उम्र नर के मुकाबले ज्यादा होती है। मादा एडीज एक बार में 50 से 100 अंडे देती है। यह एक दिन में एक किलामीटर तक 70 से 80 लोगों को काटकर बीमार कर सकती हैं।
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जिले में डेंगू के आकड़ों पर एक नजर
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वर्ष --- डेंगू मरीज
2020 --- 850
2021 --- 1216
2022 --- 53
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