फतेहपुर। पर्याप्त बजट नहीं मिलने से इस बार फिर नहरों की सिल्ट सफाई पूरी तरह से नहीं हो सकेगी। रजबहों में सिर्फ 30 प्रतिशत सफाई कार्य होगा। सफाई कार्य की लेटलतीफी से आगामी गेहूं की बुआई भी प्रभावित होगी।
जिले में 123 निचली गंगा नहर बहती हैं। इसमें 17 रजबहा और 106 माइनर हैं। इनकी कुल लंबाई 440 किमी है। सभी नहरों की सिल्ट सफाई के दो करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई। साफ-सफाई का टेंडर सितंबर में निकाला गया। लेकिन कार्य शुरू करने के लिए अभी तक विभाग को बजट ही नहीं मिला है, वहीं हर वर्ष की तरह इस बार भी बजट में कटौती करके ही स्वीकृति मिलेगी। इससे रजबहों में सिर्फ 30 प्रतिशत स्थानों की सिल्ट-सफाई का कार्य होगा। हालांकि विभाग का दावा है कि माइनरों की सफाई पूरी तरह से करेंगे। उधर नहरों का पानी भी अभी तक पूरी तरह से सूखा नहीं है। किसान दिसंबर माह से गेहूं की बुआई शुरू कर देते हैं। अब तक सफाई कार्य शुरू न होने से साफ है कि किसानों को बुआई के दौरान नहरों से पानी नहीं मिल सकेगा। उन्हें सिंचाई के लिए निजी ट्यूबवेल का सहारा लेना पड़ सकता है। अधिशासी अभियंता जेपी वर्मा ने बताया कि पूर्ण बजट न मिलने से रजबहों में सिर्फ 30 प्रतिशत जगहों पर सिल्ट-सफाई का कार्य होगा।
सिंचाई खंड भी कर रहा नहरों के पानी सूखने का इंतजार
जिले में निचली गंगा नहर के अलावा सिंचाई खंड के पास भी 86 नहर हैं। जिसमें 13 रजबहा और 73 माइनर हैं और कुल लंबाई 400 किमी है। टेंडर प्रक्रिया हो जाने के बावजूद अब तक इन नहरों में भी सफाई कार्य शुरू नहीं हुआ। विभाग के अधिकारी भी नहरों का पानी सूखने का इंतजार कर रहे है। इसके बाद सिल्ट सफाई शुरू होगी। सिंचाई खंड के अधिशासी अभियंता नंद जी गुप्ता ने बताया कि माइनर पूरी तरह से साफ होंगे।