फोटो 35- जेल में बीजों को लगाकर राखियां तैयार करती महिला बंदी और कैदी। संवाद
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जलालाबाद। रक्षाबंधन को यादगार बनाने के लिए जिला कारागार में बंदी महिलाओं ने खास तरह की राखियां बनाई हैं। है। ये राखियां खराब होने के बाद भी बेकार नहीं जाएंगी। राखियों में सब्जियों ओर फूलों के बीजों का इस्तेमाल किया है। भाइयों की कलाइयों से यह बीज जहां बिखर कर गिरेंगे, वहीं फूलों और सब्जियों के पौधे उग आएंगे। अगर कलाई पर पहनी राखी के बीज सुरक्षित भी बच जाते हैं तो इन्हें गमले या क्यारियों में डालकर पौधे तैयार किए जा सकेंगे।
जेल अधीक्षक प्रमोद त्रिपाठी ने बताया कि महिला बंदियों और कैदियों ने गेंदा, सरसों, मेथी, सोयाबीन, लोबिया, धनिया, कद्दू और चना, गुलमोहर समेत अन्य किस्मों के बीजों का इस्तेमाल किया है। ये राखियां आर्गेनिक (सीड) है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन पर जेल में महिला बंदियों द्वारा बनाई गई आर्गेनिक राखियां उन भाइयों को वितरित की जाएगी जिन भाइयों की मुलाकात करने के लिए उनकी बहनें नहीं आती है।
डीएम और एसपी ने भी महिला बंदियों व कैदियों द्वारा बनाई गई राखियाों की सराहना की है। जेल में बंद महिला बंदी सूली, गीता, ज्योति पूनम और अजमेरन के प्रयास से यह प्रयास सफल हुआ है। राखियों को तैयार कराने की जिम्मेदारी जेलर विजय कुमार शुक्ल, डिप्टी जेलर आशा देवी पांडेय और पंकज कुमार को सौंपी गई है।