कन्नौज। जिले में स्वास्थ्य विभाग के निर्माण कार्यों की रफ्तार ऐसी है कि कछुए को भी शर्म आ जाए। आठ साल पहले सपा शासनकाल में शुरू हुईं परियोजनाएं अभी भी अधूरी पड़ी हैं। जनता का पैसा अधूरी परियोजनाओं में अटका है और परियोजनाओं की लागत स्वीकृति के समय से अब तीन गुना हो चुकी है।
खास बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग के अधूरे कार्यों के कारण शासन स्तर पर जिले की रैंकिंग भी गिर रही है।
शासन ने स्वास्थ्य महकमे के निर्माण कार्यों की स्वीकृति के सापेक्ष इनके पूरे होने की स्थिति पर जिले को डी श्रेणी में रखा है। डीएम इस स्थिति पर नाराजगी जता रहे हैं, लेकिन महकमे के अफसर बजट न मिलने की बात कहकर चुप्पी साध लेते हैं।
लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दिलाने के उद्देश्य से उमर्दा में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण को 10 अक्टूबर 2014 को मंजूरी दी गई थी। मंजूरी के समय इस कार्य पर तीन करोड़ 74 लाख रुपये खर्च होने थे। स्वीकृति के 10 माह बाद पहली और दो साल बाद दूसरी और इसके एक साल बाद तीसरी किस्त निर्माण कार्य के लिए मिली। इस बीच महंगाई बढ़ी और लागत बढ़कर पांच करोड़ से अधिक हो गई।
यह बजट भी मिला और खर्च कर दिया गया, लेकिन 80 फीसदी काम ही पूरा हो पाया है। कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम की इकाई-4 के अधिकारी कहते हैं कि बाकी कार्यों के लिए और बजट चाहिए। फिर से इस्टीमेट बनाकर भेजा गया है और अब इस परियोजना की लागत बढ़कर सात करोड़ 20 लाख 22 हजार रुपये हो गई है। ऐसे में निर्माण कार्य फिलहाल बंद है।
समधन में भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण का प्रस्ताव शासन ने सपा सरकार में 10 अक्टूबर 2014 को मंजूर किया था। मंजूरी के समय इस परियोजना की लागत तीन करोड़ 74 लाख रुपये थी। तय समय में काम पूरा नहीं हुआ और महंगाई की मार इस परियोजना पर भी पड़ गई। इसका इस्टीमेट दोबारा बनाया गया और लागत बढ़कर 5 करोड़ 97 लाख रुपये हो गई।
इतना बजट भी शासन से मिला। इसे खर्च भी कर लिया गया, लेकिन वास्तविकता में निर्माण कार्य आठ साल बाद भी 90 फीसदी ही हो पाया और अब काम बंद है। इसी बीच एक बार फिर इस्टीमेट रिवाइज किया गया और अब इसकी लागत बढ़कर 10 करोड़ 52 लाख रुपये हो गई है। शासन को इसकी जानकारी दी जा चुकी है। बजट न मिलने के कारण फिलहाल काम बंद है।
पट्टी में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण का प्रस्ताव 28 अगस्त 2014 को सपा शासनकाल में स्वीकृत हुआ था। शुरुआती एक वर्ष के बाद महंगाई बढ़ऩे पर इस्टीमेट बदला गया और लागत बढ़कर एक करोड़ 47 लाख रुपये हो गई। यह बजट भी कार्यदायी संस्था को मिल गया। पूरा बजट खर्च हो चुका है, लेकिन काम 80 फीसदी ही हुआ है। अब निर्माण कार्य पूरा कराने के लिए और बजट की जरूरत है। महंगाई बढ़ गई है और 98 लाख की परियोजना एक करोड़ 77 लाख रुपये की हो गई है। मतलब 30 लाख रुपये और मिलें तब निर्माण पूरा होगा। फिलहाल बजट के अभाव में यहां भी निर्माण कार्य बंद है।
28 अगस्त 2014 को घुरपुर में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण को मंजूरी दी गई थी। निर्माण की स्वीकृति के समय परियोजना 98 लाख रुपये की थी, लेकिन बाद में परियोजना की लागत बढ़कर एक करोड़ 43 लाख रुपये हुई। यह रुपया भी शासन से मिला और निर्माण कार्यों पर खर्च भी हुआ। इसके बाद भी पीएचसी का निर्माण पूरा नहीं हो पाया। लंबे समय से बजट के अभाव में कार्य बंद है। अब इस परियोजना की लागत बढ़कर एक करोड़ 75 लाख 16 हजार रुपये हो गई है। कार्यदायी संस्था को इंतजार है कि 30 लाख रुपये और मिलें तो कार्य पूरा हो।
शनिवार को स्वास्थ्य विभाग के अधूरे निर्माण कार्यों की समीक्षा की है। कई काम ऐसे हैं, जो आठ साल से चल रहे हैं और अभी भी पूरे नहीं हो पाए हैं। कहीं न कहीं कार्यदायी संस्थाओं की भी लापरवाही है। लागत बढ़ गई है और बजट नहीं मिल पा रहा है। शासन स्तर पर भी बजट दिलाने के प्रयास किए जाएंगे, जिससे जनसामान्य को उक्त परियोजनाओं का लाभ मिल सके। -शुभ्रांत कुमार शुक्ल, डीएम।