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गोलियां लगीं, फिर भी कई दुश्मनों को मार गिराया

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कारगिल युद्ध विजेता कैप्टन रविंद्र कुमार यादव। संवाद - फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज। देश आज कारगिल विजय दिवस मना रहा है। हर कोई कारगिल के योद्धाओं को नमन कर रहा है। इस लड़ाई में जिले के लाल रविंद्र कुमार यादव ने गोली लगने के बाद भी अदम्य साहस का परिचय दिया। पांच पाकिस्तानी रेंजरों को मार गिराया था। इस दौरान रविंद्र ने कारगिल युद्ध की याद ताजा की।
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जिले के तालग्राम ब्लॉक क्षेत्र के ब्राहिमपुर गांव निवासी कैप्टन रविंद्र सिंह यादव 1982 में सेना में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। ऑपरेशन ब्लू स्टार में बेहतर प्रदर्शन करने पर केंद्र सरकार ने उन्हें 1987 में श्रीलंका भेजा था। जहां उन्होंने कई लिट्टों को मार गिराया था। 1995 में उन्होंने नागालैंड ऑपरेशन में भी अहम रोल निभाया था।
इसके बाद उन्हें पैराशूट रेजीमेंट (विशेष बल) का कैप्टन बनाकर खून जमा देने वाली ठंड में सियाचिन में पाकिस्तानी दुश्मनों से लोहा लगने के लगा दिया गया। 1999 में जब कारगिल युद्ध शुरू हुआ तो उन्हें बटालिक सेक्टर की जिम्मेदारी दी गई। यहां पाकिस्तानियों पर गोली बरसाते समय 23 जुलाई को उनके बांए पैर में गोली लग गई।
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दुर्गम चोटी पर ही घायल अवस्था में वे हिम्मत और दिलेरी से दुश्मनों पर गोलियां बरसाते रहे। उन्होंने पांच पाकिस्तानी रेंजरों को ढेर कर दिया। 26 जुलाई को दुश्मनों को खदेड़ कर वीर जवानों ने कारगिल की चोटी पर जब तिरंगा लहराया तो कई घायल जवानों के साथ उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।
तीन दिन तक बेहतर उपचार न मिलने पर उनके पैर में संक्रमण फैल गया। इससे पंजे को काटना पड़ा। कैप्टन रविंद्र यादव के अदम्य साहस और बहादुरी को देखते हुए जम्मू-कश्मीर सरकार ने उन्हें 75 हजार रुपये देकर सम्मानित किया था। 2000 में राष्ट्रपति ने उन्हें सम्मानित भी किया था। कैप्टन रविंद्र यादव का कहना है कि जब भी सीमा पर दुश्मनों की कायरता की जानकारी मिलती है तो उनका खून खौल जाता है। पैर से दिव्यांग होने के बाद भी उनके अंदर कारगिल युद्ध जैसा जज्बा बना हुआ है।
हर-हर महादेव का युद्धघोष कर टूट पड़ी थी सेना
कैप्टन रविंद्र यादव बताते हैं कि उनकी रेजीमेंट का हर-हर महादेव युद्धघोष था। दुश्मन ऊंचाई से लगातार फायरिंग कर रहे थे। उनकी रेजीमेंट मुंहतोड़ जवाब दे रही थी। 23 जुलाई को हर-हर महादेव का घोष करते हुए रेजीमेंट आमने-सामने से फायरिंग करने लगी। इस दौरान उनके पैर में गोली लग गई थी, करीब एक घंटे आमने-सामने फायरिंग के बाद दुश्मन पीठ दिखकर बंकरों में छिप गए थे।
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