कन्नौज। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देशभर में स्वच्छ भारत मिशन को साकार करने में जुटे हैं, तो दूसरी ओर जनपद के कोल्ड स्टोर स्वामी इसको तोड़ने में जुटे हैं। इन दिनों कई जगह आलू फेंक दिया गया है। यह मवेशियों का निवाला बन रहा है। कुछ दिनों बाद आलू सड़ जाएगा और दुर्गंध आने लगेगी। ये आलम तब है जब जिला उद्यान अधिकारी की ओर से कोल्ड स्टोर संचालकों को नोटिस जारी हुआ है।
हालांकि किसानों के कोल्ड स्टोर से आलू नहीं उठाने की एक वजह भाव नहीं मिलना है। जनपद में 146 कोल्ड स्टोर हैं। इसमें 15.20 लाख मीट्रिक टन आलू रखने की क्षमता है। पिछले साल 52,500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की फसल हुई थी। उत्पादन करीब 13 लाख मीट्रिक टन है। पहली दिसंबर के बाद से कोल्ड स्टोर धीरे-धीरे खाली होने लगते हैं।
इन दिनों दिनों कोल्ड स्टोर के अंदर सफाई हो रही है। जो आलू बच गया है या किल्ला फूट गया है या फिर किसी काम का नहीं है, उसे सड़कों किनारे फेंका जा रहा है।
नया आलू बाजार में आ जाने से पुराने आलू को लोग पसंद भी नहीं कर रहे हैं, जिस वजह से भी आलू फेंक दिया गया है। इससे सड़कों किनारे गंदगी बढ़ रही है। इन आलू को निराश्रित मवेशी अपना निवाला बना रहे हैं। धीरे-धीरे आलू के ढेर सड़ जाएंगे और सड़ांध शुरू हो जाएगी। इससे निकलने वाले लोगों के अलावा बीमारियां भी फैलने का खतरा हो जाएगा।
कोल्ड स्टोर की ओर से आलू बाहर फेंकने की बजाय जमीन के अंदर रखकर मिट्टी डाल देनी चाहिए। कुछ लोग चूना भी डाल देते हैं, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है।
सभी कोल्ड स्टोर स्वामियों को नोटिस भेज दिया गया है कि आलू को बाहर न फेंका जाए। जमीन खोदकर आलू रख दिया जाए और मिट्टी डाल दी जाए। आलू निस्तारण का कोई नियम नहीं है। - सीपी अवस्थी, जिला उद्यान अधिकारी
तिर्वा-कन्नौज फोरलेन किनारे टिड़ियापुर और भुगैतापुर मार्ग के बीच में कोल्ड स्टोर के सामने पिछले साल की तरह इस बार भी आलू फेंक दिया गया है।
जिला अस्पताल से आगे कानपुर की ओर जीटी रोड किनारे दोनों ओर आलू फेंका गया है। काफी आलू बोरा समेत है तो आलू किल्ला भी दे गया है।
कोल्ड स्टोरेज स्वामियों को अपनी जमीन पर खराब या बचे हुए आलू को दबा देना चाहिए। अगर कोल्ड संचालक इसे फेंक रहे हैं तो गलत कर रहे हैं। अरविंद अग्रवाल, प्रदेश अध्यक्ष
कुछ किसान आलू लेने नहीं आते हैं, तो कोल्ड स्वामी समय के बाद उसको बाहर कर देते हैं। हालांकि आलू बाहर फेंकना गलत है। निजी जमीन की खोदाई कर आलू रखने के बाद मिट्टी डाल देनी चाहिए। कुछ कोल्ड स्वामियों के पास बाहर जमीन नहीं है, वे इतनी जमीन कहां से खरीदें। साथ ही आलू की लदाई व मजदूरी भी कोल्ड की ओर से वहन किया जाता है। नगर पालिका व नगर पंचायतें भी सड़कों किनारे कूड़ा फेंकतीं हैं, इससे भी गंदगी होती है। - अतुल दीक्षित, गुरसहायगंज क्षेत्र के अध्यक्ष, यूपी कोल्ड स्टोरज एसोसिएशन
नैपालपुर गांव निवासी रितेश कनौजिया ने बताया कि उन्होंने 30 पैकेट आलू कोल्ड स्टोर में छोड़ दिया। पर्ची भी कोल्ड स्टोर प्रबंधक को वापस कर दी। पुराना आलू सस्ता होने की वजह से ऐसा किया है।
पुखरायां गांव निवासी प्रदीप कुमार ने बताया कि पुराना आलू का भाव गिरने से उन्होंने भी कोल्ड स्टोर से आलू नहीं निकाला। उसका भाड़ा आदि भी देना पड़ता। पता भी नहीं है कि कोल्ड में उनके कितने पैकेट आलू के थे।