कन्नौज। यदि जिला अस्पताल में हड्डी संबंधी तकलीफ के लिए जा रहे है तो स्मार्ट मोबाइल अवश्य लेकर जाएं। दरअसल, बजट के अभाव में शासन से एक्सरे की फिल्म मुहैया नहीं कराई जा रही है। इस कारण मरीजों को मोबाइल पर फोटो खींच कर एक्सरे की रिपोर्ट दी जा रही है।
जिला अस्पताल में घायलों और हड्डी की तकलीफ के मरीजों को अच्छी रिपोर्ट मिले। इसके लिए हाईटेक एक्सरे मशीन स्थापित है। रोजाना 50 से 60 एक्सरे होते है। हैरान कर देने वाली बात यह है कि बजट के अभाव में एक्सरे की रिपोर्ट फिल्म पर प्रिंट आउट न कर बल्कि एंड्रायड मोबाइल पर मरीजों को फोटो थमा कर दी जाती है। हल्की चोट आने पर ठीक तरह से फोटो पर दिखाई भी नहीं देती है। इस कारण मरीजों को परेशान होना पड़ता है। सबसे अधिक दिक्कत ऐसे मरीजों के सामने आती है, जिनके पास साधारण मोबाइल है या फिर उनके पास फोन ही नहीं है। सीएमएस डॉ. शक्ति बसु ने बताया कि कई बार शासन को बजट मुहैया कराने के लिए पत्र लिखा गया है। बजट न मिलने के कारण बगैर फिल्म के मोबाइल पर फोटों खींच कर देनी पड़ती है। जबकि मेडिकोलीगल के मामलों में फिल्म पर एक्सरा प्रिंट आउट कर दिया जा रहा है।
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फिल्म देेेने पर रोजाना आता है दो हजार का खर्च
एक एक्सरे की फिल्म कीमत करीब 40 रुपये है। जिला अस्पताल में रोजाना 50 से 60 मरीजों के एक्सरे होते है। इससे फिल्म पर एक्सरे देने पर रोजाना करीब दो हजार का खर्च आएगा।
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मोबाइल न होने पर दूसरे मरीज ने की मदद
बहादुरपुर गांव निवासी रमेश कुमार (55) के हाथ में चोट लग गई। कम पढ़े-लिखे होने के कारण मोबाइल नहीं रखते है। गुरुवार को एक्सरेा करने पर कर्मचारी नेे मोबाइल पर फोटो खींच कर देने को कहा। इससे समस्या खड़ी हो गई। तब दूसरे मरीज के मोबाइल से फोटो खींची ग्रइ।