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बागवानी तो ठीक लेकिन करते रहें गमलों और पौधों की सफाई

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नकटिया में घरों के की गई बागवानी। - फोटो : AMAR UJALA
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बरेली। हर कोई प्रकृति के बीच रहना चाहता है। रंगबिरंगे फूल और हरियाली सभी को भाते हैं। इससे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य भी जुड़ा है। इसके लिए कहीं दूर जाने की जरूरत नहीं, घर पर ही नैसर्गिक सौंदर्य का आनंद ले सकते हैं। बस थोड़ा समय और लगन चाहिए। इस समय लॉकडाउन के दौरान कई लोग बागवानी करने में जुटे हुए हैं। आईवीआरआई के बागवानी विशेषज्ञ रंजीत सिंह बताते हैं कि आजकल लॉककडाउन के कारण अधिकांश लोग घर में ही हैं, और खाली समय का सदुपयोग अपने घर की फुलवारी बाग बगीचे में भी कर रहे हैं। इस समय थोड़ा सावधानी बरतने की जरूरत है। गमले में या क्यारियों में लगे हुए फूलों में जो पूरी तरह से खिल चुके हैं और सूखने की ओर हैं उनको कैंची से काट कर अलग कर लें। वह कंपोस्ट के गड्ढे में डाल दें। ऐसे ही यदि गुलाब में यदि डाई बैक लगा है, तो रोग ग्रस्त स्थान से एक इंच दूर से कैची से निकाल दे और कटे हुए भाग पर कॉपर ऑक्सिक्लोराइड का किसी तेल के साथ लेप बनाकर लगा दें। इस समय सालविया,गिलार्डिया, पिटूनिया, गोफ्रीना, गजेनिया, डाएंथोस, स्वीट विलियम, जिरेनियम आदि के गमलो से सूखे फूलों व बीमारी ग्रस्त टहनियों को काटकर अलग कर दें गमलों से खरपतवार निकालकर हल्की गुड़ाई कर दें व गोबर की सड़ी हुई खाद उसमें मिला दें। यह तीनों ही तरह के फूल के पौधे लंबे समय तक फूल देते रहते हैं। ऐसे गमलों को सूखने से बचाएं : इसके अलावा गर्मियों में गमलों व क्यारियों से पानी सूखने की समस्या बहुत रहती है। साथ ही बार-बार पानी लगाना पड़ता है। कभी घर से बाहर जाना हो तो पौधे सूखने का डर रहता है। इसके लिए गमले या क्यारी में पूसा हाइड्रोजेल का प्रयोग किया जा सकता है। हाइड्रोजेल चीनी की तरह पालीमर के टुकड़े होते हैं जो पानी को सोख कर भूल जाते हैं और जब पौधों को पानी मिट्टी से नहीं मिल पाता, उस समय जड़ों को पानी उपलब्ध कराते हैं। एक गमले में एक चम्मच व 20 ग्राम हाइड्रोजेल प्रति मीटर स्क्वायर की क्यारी में प्रयोग करने से पानी की कमी के कारण पौधे नहीं सूखते हैं ,साथ ही गोबर की सड़ी हुई खाद अथवा वर्मी कंपोस्ट का अधिक से अधिक प्रयोग करने गमलों अथवा क्यारी में सूखे पत्तों से खाली जगह को ढकने से भी पानी का कम नुकसान होता है। यदि हाइड्रोजेल उपलब्ध ना हो पाए तो गमले अथवा क्यारी के ऊपरी मिट्टी में फोम के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर भी मिलाए जा सकते हैं।
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आईवीआरआई कैम्पस में की गई बागवानी। - फोटो : AMAR UJALA
आईवीआरआई कैम्पस में की गई बागवानी।
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