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इत्रनगरी में गूंजी गम-ए- हुसैन की सदाएं, निकला दुलदुल जुलूस

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कन्नौज। इत्रनगरी में मोहर्रम पर कई मोहल्ले और इमाम चौकों से कर्बला के शहीदों की याद में मातमी धुनों के साथ जुलूस निकाले गए। शनिवार को सात मोहर्रम को दुलदुल के जुलूस में गम-ए- हुसैन की सदाएं गूंजीं।
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छोटे-छोटे जुलूस शुरू होकर शहर के शेखपुरा मोहल्ले में एकत्र हुए। इसके बाद शुरू हुआ दुलदुल जुलूस नखासा मोहल्ला, होली मोहल्ला, हरदेवगंज, बड़ा बाजार, मिठाई गली, गल्लामंडी समेत कई इलाकों से गुजरा। जुलूस का कई स्थानों पर पूरी शिद्दत के साथ स्वागत किया गया। इस दौरान इमाम हुसैन की याद में उनके नाम की सदाएं गूंजती रहीं।
जुलूस में शामिल अकीदममंद इस्लामी झंडे लिए हुए या हुसैन का नारा लगाते रहे। युवाओं ने मातमी धुन पर जंग की याद दिलाई। मौलाना नूरुद्दीन आफाकी ने बताया कि इंसानियत को बचाने के लिए इमाम हसैन शहीद हुए थे। उन्होंने बताया कि इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना मोहर्रम का होता है। इमाम हुसैन ने इंसानियत को जिंदा रखा था।
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करतब और रंग बिरंगे ताजिया देखने उमड़ी भीड़
मोहर्रम की सात तारीख को निकले दुलदुल के जुलूस के साथ रंग बिरंगे कई ताजिया भी शामिल रहे। जिनको देखने के लिए सड़कों, चबूतरों और छतों पर लोगों की भीड़ उमड़ी। युवाओं ने करतब और प्रदर्शन कर जुलूस की शोभा बढ़ाई।
पुलिस प्रशासन रहा चौकन्ना
शनिवार को शहर में निकले मोहर्रम जुलूस को लेकर पुलिस प्रशासन चौकन्ना रहा। बड़ी संख्या में पुलिस और पीएसी के जवान जुलूस के साथ मुस्तैद रहे।
इमाम हुसैन की याद में युवकों ने किया नौहाख्वानी व मातम
सौरिख। राजापुर इमामबाड़ा से शुरू हुआ अलम का जुलूस सौरिख सदर बाजार व कस्बे के कई मोहल्लों से निकला। पाल तिराहे के सामने जुलूस का समापन हुआ। जुलूस में शामिल युवकों ने इमाम हुसैन की याद में नौहाख्वानी व मातम किया।
मोहर्रम कमेटी के अध्यक्ष अली अब्बास ने बताया कि मोहर्रम गम का महीना है। इमाम हुसैन को मानने वाले हुसैनी होने का संकल्प लें और उनका पैगाम लोगों तक पहुंचाएं।
कर्बला में जो जुल्म इमाम हुसैन के साथ हुए उसकी खिलाफत करना हर हुसैनी की जिम्मेदारी है। जुलूस में निसार हुसैन, हुसैन हैदर, नाजिम हुसैन, अली अख्तर, शब्बर अली, हैदर अब्बास, शीलू नकबी, निशात हुसैन मौजूद रहे। विशुनगढ़ प्रतिनिधि के अनुसार जुलूस ए मोहम्मदी गमगीन माहौल में कस्बे की मस्जिद से शुरू हुआ। जुलाहपुरी इमाम चौक होते हुए मस्जिद पर पहुंचकर समापन हुआ। जुलूस में शकील अहमद, छोटे मिस्त्री, लईक, छुट्टन, अकबर हुसैन, सद्दाम हुसैन, साबिर हुसैन समेत कई युवक शामिल हुए। जुलूस के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर थानाध्यक्ष किशनपाल के नेतृत्व में भारी पुलिस मौजूद रहा। (संवाद)
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