कन्नौज। जिले के सांसद और विधायकों ने भी टीबी के मरीजों को बीमारी से निजात दिलाने में विभाग की पहल पर खुद ही अमल नहीं किया। ऐसी सूरत में अधिकांश मरीजों को खुद स्वास्थ्य महकमे से जुड़े लोगों ने ही आगे आकर मरीजों की मदद की।
दरअसल, सरकार की ओर से टीबी की बीमारी को खत्म करने के लिए समय-समय पर लगातार अभियान चलाया जा हा है। कोशिश है कि वर्ष 2025 तक देश से इस बीमारी को दूर किया जा सके। इसी कड़ी में यहां भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर मरीजों की पहचान के लिए सर्वे करवाकर उन्हें चिह्नित किया जा रहा है। पहचान होने के बाद उन्हें निशुल्क इलाज देने और पोषण के लिए हर महीने 500 रुपये की मदद भी दी जा रही है। यह मदद तब तक दी जा रही है जब तक मरीज टीबी से निजात न पा ले। पिछले साल जब जिले में टीबी के मरीजों को चिह्नित किया गया तो उन्हें गोद लेकर पुष्टाहार देने की भी पहल की गई। इसके लिए प्रभावशाली लोगों से भी अपील की गई। उसमें जनप्रतिनिधियों से भी सहयोग की अपील की गई। बाकायदा जनप्रतिनिधियों ने रजामंदी भी दी, लेकिन अपने सियासी वादों की तरह वह इस जिम्मेदारी को भी भूल गए। ऐसी सूरत में विभाग ने खुद और दूसरे लोगों की मदद से पुष्टाहार किट बंटवाया।
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पिछले साल 1751 मरीज हुए थे चिह्नित, 1305 को लिया जाना था गोद
पिछले वर्ष 2022 में स्वास्थ्य विभाग की ओर से अलग-अलग समय पर कराए गए सर्वे के दौरान जिले भर में 1751 लोगों को टीबी मरीज के रूप में चिह्नित किया गया था। उसमें से विभाग के पूछने पर 1305 मरीजों ने पुष्टाहार की मदद लेने की इच्छा जताई थी। उसके बाद विभाग की पहल पर जिले भर से 368 लोगों ने अपने-अपने क्षेत्र के टीबी मरीजों को गोद लेकर उन्हें विभाग की ओर से तय मानक के तहत पुष्टाहार की किट दी थी। लोगों ने दिलचस्पी ली और 1305 के बजाए 1422 मरीजों को मदद पहुंचाई। हकीकत यह रही कि जनप्रतिनिधि दूर रहे। स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार भी बताते हैं कि डीएम की पहल पर हुई बैठक में जनप्रतिनिधियों ने अपना नाम तो लिखवाया था पर मरीज को मदद नहीं पहुंचाई।
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इस बार फिर भी 448 मरीज चिह्नित
इस बार पहली जनवरी से अब तक 23 मार्च तक स्वास्थ्य विभाग ने जिले के अलग-अलग हिस्सों से 524 मरीजों में टीबी की बीमारी पाई है। इनमें से 448 मरीजों को गोद लेने के लिए चिह्नित किया गया है। हालांकि गोद कौन लेगा यह अभी तय नहीं हुआ है। स्वास्थ्य महकमे के अफसरों का कहना है कि बैठक कर इसकी लिस्ट भी जल्द तैयार की जाएगी। हालांकि आने वाले महीनों में होने वाले नए सर्वे में और भी मरीज की पहचान की जाएगी। उसकी लिस्ट अलग से बाद में बनेगी।
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एक मरीज को देनी होती है 650 रुपये की किट
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. केपी त्रिपाठी ने बताया कि टीबी से ग्रसित मरीजों को मदद देने के लिए जो किट मुहैया कराई जानी है, उसमें एक महीने का खर्च 650 रुपये है। एक मरीज को छह महीने तक यह किट दी जाती है। इसमें एक किलोग्राम मूंगफली, एक किलोग्राम भुना चना, एक किलोग्राम गुड़, एक किलोग्राम सत्तू और एक किलोग्राम तिल-गजक दिया जाता है। इसकी मदद से मरीज को जरूरी पोषण मिलती है, जिसकी उसे जरूरत है।
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जिम्मेदारों का बयान
फोटो: 07- शुभ्रांत शुक्ला।
जिले में टीबी के मरीजों की बेहतर इलाज और पोषण के लिए सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों सहित समाज के सम्पन्न वर्ग से मदद की भी पहल की जा रही है। सभी की मदद से टीबी पर अंकुश लगाने में कामयाबी मिलेगी। इसमें प्रशासन के साथ ही समाज की भी मदद की जरूरत है। सभी के सहयोग से यह मुमकिन है। शुभ्रांत शुक्ला, डीएम
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फोटो:08-डॉ. विनोद कुमार।
स्वास्थ्य महकमे की ओर से समय-समय पर अभियान चलाकर और सर्वे के माध्यम से टीबी से ग्रसित मरीजों की पहचान कर उनका इलाज किया जा रहा है। विभाग की ओर से उन्हें हर संभव मदद भी दी जा रही है। इस वर्ष भी मरीजों की पहचान की गई है। उन्हें हर मदद मुहैया कराई जाएगी।
डॉ. विनोद कुमार, सीएमओ
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फोटो:09-डॉ. केपी त्रिपाठी।
टीबी से ग्रसित मरीजों को विभाग की ओर से निशुल्क इलाज मुहैया कराने के साथ ही उन्हें इलाज के दौरान तक हर महीने 500 रुपये की आर्थिक भी मदद दी जाती है। उन्हें बेहतर पोषण के लिए जनसहभागिता से एक किट देने का प्रावधान है। उसकी कीमत 650 रुपये है। जनप्रतिनिधि भी इस अभियान में जुड़ जाएं तो बेहतर होगा।
डॉ. केपी त्रिपाठी, डीटीओ