छिबरामऊ। चकबंदी प्रक्रिया को लेकर डीएम ने चौपाल लगाकर नंदलालपुर गांव के ग्रामीणों के साथ बैठक कर उनकी शंकाएं दूर की। कहा कि किसान सहयोग करें, जल्द ही उनके हाथों में भू-अभिलेखों की खतौनी होगी।
डीएम ने बताया कि शिकायतों के चलते चकबंदी प्रक्रिया जहां से रोकी गई थी, वहां से इस कार्य को आगे बढ़ाने की अनुमति शासन से मिल गई है। उन्होंने इलाके के काश्तकारों को चकबंदी प्रक्रिया पूर्ण कराने की रूपरेखा को विस्तार से बताया। कहा कि चकबंदी कार्य पूरी पारदर्शिता के साथ होगा। सभी सुनवाई की जाएगी और चकबंदी की जो प्रक्रिया है, उसी सिद्धांत पर खसरा, खतौनी, नक्शा बनाए जाएंगे। भू अभिलेख मिलने के बाद ही सभी काश्तकारों को सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिलना शुरू हो जाएगा, सभी इस कार्य में लगे कर्मियों का सहयोग करें। इस मौके पर एसओसी मोहनलाल, एसडीएम अशोक कुमार, सीओ चकबंदी सुभाष चंद्र सहित गांव के सुधीर दुबे, दिनेश चंद्र, नरेंद्र पाल आदि मौजूद रहे।
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यह है पूरा मामला
दरअसल अब से चार दशक पहले सन 1980 में चकबंदी प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन आरक्षण आंदोलन के दौरान तत्कालीन जनपद फर्रुखाबाद स्थित फूस बंगला अग्निकांड में 35 गांव के चकबंदी अभिलेख जल गए थे। तत्कालीन सीओ रवींद्र पांडेय ने चकबंदी प्रक्रिया नंदलालपुर गांव से शुरू कराई थी। साल 2020-21 में एक अभिलेख बन कर तैयार हो गया था। पर्चा पांच और ग्यारह ग्रामीणों को बांटा दिया गया था, परंतु आगे की कार्रवाई विरोध के चलते शुरू नहीं हो सकी और उनका स्थानांतरण करा दिया गया।