छिबरामऊ/सिकंदरपुर। शिव शक्ति साईं धाम आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान वृंदावन से पहुंचे स्वामी चैतन्य कौशिक जी महाराज ने भक्तों को सनातन धर्म की विशेषताएं बताईं। भक्त प्रहलाद की कथा के प्रसंग सुनाते हुए कहा कि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु हैं।
उन्होंने कहा कि भक्त प्रहलाद ने माता कयाधु के गर्भ में ही नारायण नाम का मंत्र सुना था। इस मंत्र के जाप के कारण ही असुर कुल में जन्म ध्रुव को देव मानव का दर्जा प्राप्त हुआ। बच्चों को जो धर्म का ज्ञान बचपन में ही दिया जाता है, वह जीवन भर उसका ही स्मरण करता है। बच्चों को सिखाना चाहिए कि माता पिता की सेवा व प्रेम के साथ समाज में रहने की प्रेरणा ही धर्म का मूल आधार है।
बच्चों को संस्कार देने की जिम्मेदारी सबसे पहले मां की होती है। मां बच्चों को जैसे संस्कार देगी, बच्चे उसी का अनुसरण करते हैं। दानव कुल की मां कयाधु से मिले अच्छे संस्कारों के कारण ही ध्रुव को पांच वर्ष की आयु में भगवान हरि के दर्शन प्राप्त हुए। इसके अलावा स्वामी संपूर्णानंद महाराज जी ने नरसिंह अवतार व हिरण्याकश्यप वध कथा के प्रसंग सुनाएं। इस मौके पर अनुज शुक्ला, ददुआ शुक्ला, प्रमोद दुबे, सुदेश दुबे और ओमप्रकाश शुक्ला आदि मौजूद रहे।