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Kannauj News: जिला अस्पताल को कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट का मिला लाइसेंस

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कन्नौज। अब एक यूनिट खून से चार लोगों को जीवनदान मिल सकेगा। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में लगी कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट के संचालन के लिए लाइसेंस मिल गया है। जल्द ही इसका संचालन भी शुरू हो जाएगा। यूनिट के संचालन के बाद डेंगू जैसी बीमारी में मरीजों को प्लेटलेट्स, प्लाज्मा के लिए कानपुर की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
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जिले में अभी तक एक यूनिट रक्त सिर्फ एक की ही जान बचा सकता था। कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट न होने के कारण रक्त से आरबीसी, प्लेट्लेट्स, प्लाज्मा, क्राओ प्रेसिपिटर में विभक्त नहीं किया जा पा रहा था। मरीजों की परेशानियों को देखते शासन स्तर से यूनिट की स्थापना के लिए यूपीएमएससीएल को बजट आवंटित कर किया गया था। पिछले साल यूनिट के उपकरण आना शुरू हो गए और फरवरी में सभी उपकरण आ गए।
मशीनों के आने के बाद अस्पताल प्रशासन लगातार शासन स्तर से पत्राचार कर लाइसेंस जारी कराने में लगा था। अब अस्पताल को कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट के संचालन का लाइसेंस मिल गया है। (संवाद)
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इनसेट

डॉक्टर और टेक्नीशियन को दिया गया प्रशिक्षण

ब्लड बैंक के डॉ. विभांशु चतुर्वेदी और टेक्नीशियन अभिषेक प्रजापति को लखनऊ में चार दिन का प्रशिक्षण दिया गया था। प्रशिक्षण के बाद लाइसेंस का इंतजार हो रहा था। अब लाइसेंस मिल गया है, जल्द ही डेमो कराकर यूनिट का संचालन शुरू कर दिया जाएगा।

इनसेट
फोटो :12: सुनील पाठक। संवाद
एक माह में दिया जाता 50-60 यूनिट रक्त

ब्लड बैंक प्रभारी सुनील पाठक का कहना है कि अभी औसतन एक माह में ब्लड बैंक से 50-60 यूनिट रक्त दिया जाता है, जिससे सिर्फ 50-60 मरीजों की ही जान बचाई जा सकती है, लेकिन यूनिट के काम करने के बाद एक यूनिट को चार जगह विभक्त कर चार की जान बचाई जा सकेगी। फिर यदि किसी रोगी को प्लाज्मा या प्लेटलेट्स की जरूरत है तो उसे वही दिया जाएगा। आरबीसी व क्राओ की बचत होगी।



एक यूनिट से ये चीजें होंगी अलग

- पीआरबीसी-पैक्ड आरबीसी
- प्लेटलेट्स

- प्लाज्मा

- क्राओ प्रेसिपिटर

वर्जन
फोटो :13: डॉ. शक्ति बसु। संवाद
रक्त के बदले मिलेंगे प्लेटलेट्स, प्लाज्मा

कंपोनेंट सेपरेटर यूनिट के संचालन के लिए जिला अस्पताल को लाइसेंस मिल गया है। जल्द ही इसका डेमो कराया जाएगा, जिसके बाद यूनिट का संचालन शुरू हो जाएगा। प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, आरबीसी और क्राओ की आवश्यता पड़ने पर मरीज के तीमारदार को रक्त देना पड़ेगा। डेंगू के सीजन में मरीजों को इसका काफी लाभ मिलेगा और दूसरे जिलों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
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- डॉ. शक्ति बसु, सीएमएस
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