कन्नौज। गंगा किनारे बसे 12 गांवों के लोग बाढ़ की मार झेल रहे हैं। बाढ़ ग्रामीणों के लिए मुसीबत बनी हुई है। ग्रामीणों को बाढ़ ग्रस्त गांवों में संक्रामक रोग फैलने का डर सता रहा है। बाढ़ के पानी से घिरे गांवों में मच्छरों व कीट पतंगों की संख्या में तेजी से इजाफा होने लगा है। ऐसे में लोगों को मलेरिया, डेंगू जैसे रोग फैलने की आशंका है। संक्रामक रोग की रोकथाम के लिए प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नीं उठाया गया है। शनिवार को गंगा का जलस्तर 125.700 मीटर दर्ज किया गया।
कासिमपुर, बक्शीपुरवा, फिरोजपुर कटरी, कटरी अमीनाबाद, अलियापुर, तुलापुरवा, लिख्खापुरवा, जुकईया, कन्नौज कछोहा के अलावा पास ही के हरदोई जनपद के खालेपुरवा, भूढ़मढ़ईया, मल्हानपुरवा, पैशनपुरवा, गुलाबपुरवा, सेतनपुरवा, रमेश्वरपुरवा सहित कई गांव बाढ़ की चपेट में हैं। इससे जनजीवन पूरी तरह से अस्तव्यस्त है। ग्रामीण दिन भर पानी में आवाजाही कर रहे हैं। ऐसे में बदले मौसम की मार झेल रहे बाढ़ ग्रस्त गांव के लोगों को अब संक्रामक रोग फैलने का डर सताने लगा है। नदी का जलस्तर जब कम होगा तो दुर्गंध और संक्रामक बीमारी फैलने खतरा बना रहेगा। गांवों में पानी भरने से मच्छरों की संख्या भी बढ़ने लगी है। इससे जल जनित बीमारियों के फैलने की संभावना भी बढ़ गई है।
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फोटो 06- रोड पर अनाज को सुखाते बाढ़ पीड़ित लोग। संवाद
तंबू में रह रहे बाढ़ पीड़ितों को खाने के पड़े लाले
बाढ़ का पानी गांवों में घुसने से घर जलमग्न हो गए हैं। इससे गृहस्थी पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। ग्रामीण सड़क किनारे तंबू डालकर रहने को मजबूर हैं। ऐसे में बाढ़ प्रभावित लोगों को खाने के लाले पड़ गए हैं। ग्रामीण पानी में भीगे अनाज को सड़क पर डालकर सूखा रहे हैं। जिससे भूखे बच्चों का पेट भरा जा सके।
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घर से निकलना मुश्किल
बाढ़ग्रस्त गांव के बाशिंदों के सामने आवागमन की परेशानी खड़ी हो गई है। गांव की गलियों और सड़कों पर पानी भरा होने से आवागमन मुश्किल हो गया है। पैदल निकलना भी मुश्किल भरा है। दोपहिया चलाने की गुंजाइश नहीं है। नाव का ही सहारा बचा है। कई जगह लोग कमर भर पानी में होकर गुजर रहे हैं।