कन्नौज। बुधवार की सुबह जिले में दिल दहला देने वाली खबर लेकर आई। जयपुर से फर्रुखाबाद आ रही प्राइवेट वाल्वो बस के इटावा-मैनपुरी मार्ग पर पलटने से जिले के नौ लोगों की मौत हो गई। मैनपुरी जिले में हुए इस हादसे का शोर कन्नौज जिले तक सुनाई दिया। घरों में मची चीखपुकार से हर आंख नम हो गई।
हादसे में छिबरामऊ के मानपुर गांव में रहने वाले तीन युवकों प्रदीप (16), नंदन (22) और ज्ञानेंद्र सिंह (24) की मौत हो गई। ये तीनों जयपुर में रहकर इलेक्ट्रिशियन का काम कर रहे थे। इनके अलावा तालग्राम कस्बे के गांव मवईया निवासी चंद्र किशोर (37) और खबरामऊ गांव निवासी मस्तान (45) ने भी जान गवां दी। जसोदा के कलापुर गांव निवासी मोहर्रम (38) और ठठिया के गांव औसेर निवासी मोहम्मद आजाद (20) की भी हादसे में मौत हो गई। इसके साथ ही मियांगज के वारिश(30) और याकूबपुर के अकील (32) की भी हादसे में मौत हो गई। सुबह करीब छह बजे हुए हादसे की जानकारी जैसे ही मृतकों के परिजनों तक पहुंची कोहराम मच गया और लोग तुरंत मैनपुरी की ओर रवाना हो गए। मानपुर गांव के तीनों युवकों और औसेर के मोहम्मद आजाद का शव गांव पहुंच गए थे, अन्य के भी देर शाम तक शव घर पहुंचने की उम्मीद है।
पिता के इलाज के लिए कमाने गया था आजाद
ठठिया। थानाक्षेत्र के गांव औसेर में रहने वाला मोहम्मद आजाद (20) तीन भाइयों और तीन बहनों में सबसे छोटा था। बड़े भाई शानू और नौशाद जयपुर में रहकर सिलाई का काम कर रहे हैं, यहां पिता शरीफुद्दीन (70) अक्सर बीमार रहते हैं। भाइयों पर पिता के इलाज के साथ परिवार का भी खर्च होने से आजाद भी भाइयों के साथ काम करने जयपुर चला गया। जाते वक्त पिता से कहा था कि वह हर महीने पैसे भेजेगा ताकि उनका अच्छा इलाज हो सके और वह जल्द स्वस्थ हो जाएं। पिता की उम्मीद पर आजाद खरा भी उतर रहा था लेकिन घर लौटने के लिए वह जिस बस में सवार हुआ, उसके चालक की एक झपकी ने आजाद को हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया। शरीफुद्दीन की उम्मीदें भी इसी के साथ धूमिल हो गईं। शरीफुद्दीन का परिवार बेहद गरीब है। बेटों के भेजे पैसों से ही किसी तरह घर चल रहा था। बुधवार शाम करीब पांच बजे आजाद का शव गांव पहुंच गया। लोगों की भीड़ घर के बाहर जुट गई।
पांच बच्चों के सिर से छिन गया सहारा
जसोदा। क्षेत्र के गांव कलापुर निवासी मोहर्रम (40) पुत्र जमालुद्दीन पांच वर्षों से जयपुर में रहकर सिलाई का काम कर रहा था। घर पर पत्नी आमना के अलावा पांच बच्चे हैं, इनमें बेटी कैकशा (12), आफरीन (10), फरीन (9), जयस रजा (7) और अवैश रजा (5) शामिल हैं। सभी बच्चों की पढ़ाई और घर खर्च की जिम्मेदारी मोहर्रम पर ही थी। ईद पर घर आने के लिए वह जयपुर से चला था। बच्चों और पत्नी ने फोन पर ही मोहर्रम से अपनी फरमाइशें बता दी थीं, मोहर्रम भी उत्सुक था कि जल्द घर पहुंचकर सबसे पहले पत्नी और बच्चों को ईद की खरीदारी कराएगा। मंगलवार सुबह मोहर्रम ने फोन पर पत्नी को आने की जानकारी भी दे थी। बुधवार सुबह तक उसके घर पहुंचने की उम्मीद थी तो उससे पहले पत्नी को उसकी मौत की सूचना मिली। इसके बाद घर की दीवारें चीख पुकारों से दहल उठीं। आसपास के लोग परिवार को हौसला देने पहुंचे लेकिन घर का इकलौता सहारा छिन जाने से उनके भी आंसू रुक नहीं सके।
चंद्रकिशोर को पिता ने जयपुर जाने को रोका था
कन्नौज। तालग्राम के मवईया गांव में रहने वाले चंद्रकिशोर (40) पुत्र राजकुमार पाल के परिवार में मां-बाप के अलावा पत्नी अनीता के अलावा तीन बेटी कोमल (15), कामिनी (9), सौम्या (5) और बेटा सूर्या (डेढ़ वर्ष) हैं। गांव में रहकर खेती और मजदूरी करके किसी तरह वह परिवार पाल रहा था। लेकिन कम आमदनी से परिवार नहीं चल रहा था। ऐसे में वह दो माह पहले ही आइसक्रीम-कुल्फी का काम करने जयपुर चल गया। धंधा धीरे-धीरे जम रहा था और परिवार की आर्थिक स्थिति पटरी पर आ रही थी लेकिन मंगलवार को वह जयपुर से जिस बस से चला वह फर्रुखाबाद पहुंचने से पहले ही हादसा का शिकार हो गई। हादसे की जानकारी जैसे ही पत्नी अनीता और माता-पिता को मिली चीखपुकार मच गई। अनीता रो-रोकर बदहवास हो गई। पिता राजकुमार उस दिन को कोस रहे थे जब बेटा चंद्रकिशोर जयपुर के लिए निकला था। राजकुमार ने उसे रोका भी था कि जो है उसी में बसर कर लेंगे लेकिन चंद्रकिशोर अपनी स्थिति से संतुष्ट नहीं था और पिता के कई बार रोकने के बाद भी वह जयपुर चला गया।
मां के बाद पिता भी छोड़कर चले गए
कन्नौज। तालग्राम के खबरामऊ गांव में रहने वाला मस्तान (45) के परिवार में मां-बाप नहीं हैं। परिवार में पत्नी मुनीसा के अलावा दो बेटे अनीस (18), फैजान (10) और दो पुत्रियां अंजुम (20) और मुस्कान (13) हैं। बच्चों की शादी होनी है। मस्तान राजस्थान के जिला दौसा के लाल सौंठ में रहकर बर्फ का धंधा कई साल से कर रहा था। ईद पर घर लौट रहा था। बच्चे और पत्नी मस्तान के आने का इंतजार कर रहे थे। उसने बुधवार सुबह करीब दस बजे तक घर पहुंचने की बात कही थी। मंगलवार रात को आखिरी बार बात हुई और उसके बाद सुबह उसने फोन करने के लिए पत्नी से कहा था। मस्तान के आने के कारण घर के लोग तड़के ही उठ गए। लेकिन सुबह करीब 10 बजे घर मस्तान के आने की जगह उसकी मौत की सूचना पहुंची। इससे कोहराम मच गया। पत्नी और बच्चों की चीखें हर तरफ गूंजने लगीं।