कालाबाजारी के आरोप में पकड़ा गया कोटे का राशन छोड़े जाने के मामले में तत्कालीन जिला पूर्ति अधिकारी और तत्कालीन एसडीएम के खिलाफ विशुनगढ़ थाने में अमानत में खयानत व धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है। कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुए मुकदमे में कोटेदार व दो प्रधान भी नामजद हुए हैं।
विशुनगढ़ थाने के गांव धनसिंहपुर नगरिया निवासी विनोद कुमार यादव पुत्र रघुवीर सिंह ने न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज कराया है कि 29 अगस्त 2016 को ग्राम सरदामई के कोटेदार छविनाथ सिंह पुत्र छदामीलाल शाक्य व विशुनगढ़ की प्रधान कौशल्या देवी पत्नी गणेश वर्मा के पुत्र अखिलेश राजपूत ट्रैक्टर से 35 बोरी राशन कालाबाजारी के लिए जिला मैनपुरी की ओर ले जा रहे थे। उस समय विशुनगढ़ का कोटा भी सरदामई से अटैच था। जिले की सीमा पर पुलिस ने राशन पकड़ लिया। ट्रैक्टर थाने ले जाया गया।
इसके बाद तत्कालीन एसडीएम महेशप्रसाद दीक्षित व तत्कालीन जिला पूर्ति अधिकारी संतोष कुमार सिंह ने कार्रवाई के नाम पर खानापूरी की। उस समय केवल कोटेदार का कोटा निलंबित किया, जिसे बाद में फिर बहाल कर दिया गया। कोटेदार से पैसे लेकर उसे छोड़ दिया गया और इस घटना का मुकदमा भी दर्ज नहीं किया गया। कोर्ट के आदेश पर रविवार को धारा 406 व 420 के तहत तत्कालीन एसडीएम, डीएसओ, प्रधान विशुनगढ़ कौशल्या देवी, प्रधान सरदामई रामप्रकाश शाक्य व कोटेदार छविनाथ सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। सीओ सोमेंद्र कुमार नेगी ने बताया कि मामले की निष्पक्ष विवेचना की जाएगी।
तत्कालीन एसडीएम महेशप्रसाद दीक्षित इस समय जिला ललितपुर में सदर एसडीएम के पद पर तैनात हैं। उन्होंने बताया कि पुुुुलिस ने राशन पकड़ा था। इसकी पूर्ति निरीक्षक के माध्यम से जांच कराई गई थी। उन्होंने रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेज दी थी। डीएम ने कोटेदार के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश भी दिए थे। उन्होंने कोटेदार का कोटा उसी समय निलंबित भी कर दिया था। डीएम के आदेश पर पुलिस ने रिपोर्ट क्यों नहीं दर्ज की, यह जांच का विषय है। तत्कालीन जिला पूर्ति अधिकारी संतोष कुमार सिंह इस समय लखनऊ में तैनात हैं। उनसे बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।