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नाबालिग से दुष्कर्म में 10 साल का सश्रम कारावास

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कन्नौज। छह साल नाबालिग लड़की को बहला फुसलाकर ले जाने व दुष्कर्म के मामले में एडीजे/फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश ने आरोपी को 10 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। जुर्माना न देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।


शासकीय अधिवक्ता छेदीलाल गौतम ने बताया कि तालग्राम क्षेत्र के एक ग्रामीण ने लिखाई रिपोर्ट में बताया 11 जुलाई 2012 को उसकी 16 वर्षीय पुत्री सुबह पांच बजे शौच को बाहर गई थी। वहां से धर्मवीर पुत्र रामसेवक निवासी मदारीपुर थाना तालग्राम साथी मनोज, नेत्रपाल व अवधेश के साथ उसकी पुत्री को बहला फुसलाकर ले गया था। पुलिस ने मामला दर्ज कर एक महीने बाद थाना सौरिख क्षेत्र से लड़की को बरामद कर लिया। विवेचक तत्कालीन एसआई भूूमिराज सिंह को लड़की ने बयान में बताया था कि धर्मवीर ने उसके साथ जबरन एक माह तक दुष्कर्म किया। पुलिस ने लड़की का मेडिकल टेस्ट कराया।
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विवेचना में मनोज, नेत्रपाल व अवधेश को जांच में दोषमुक्त पाए गए। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान धर्मवीर को दुष्कर्म का दोषी माना। एडीजे/फास्ट ट्रैक कोर्ट न्यायाधीश संजीव तिवारी ने 10 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। जुर्माना न देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।


नाबालिग से दुष्कर्म में 10 साल की सजा
क्रासर
- फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम ने सुनाया फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
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