सदर कोतवाली क्षेत्र के गांव भिम्मापुरवा में शनिवार रात आग लग गई। अग्निकांड में एक बालक जिंदा जल गया। झोपड़ीनुमा 37 घरों में रखी लाखों रुपये की संपत्ति राख हो गई। एसडीएम समेत राजस्व टीम ने गांव में पहुंचकर क्षति का जायजा लिया और राहत वितरण कार्य शुरू कराया। आग कैसे लगी, यह साफ नहीं हो सका है। गांव में पूरी रात चीख-पुकार मची रही। गंगा व काली नदी के बीच कटरी क्षेत्र में बसे गांव भिम्मापुरवा में शनिवार रात गांव वाले खा-पीकर सो गए।
इसी दौरान अचानक एक घर में आग लग गई। आग ने देखते ही देखते गांव के हरिशचंद्र, रामसागर, विनोद कुमार, श्याम बाबू, शिवचरन, रामप्रकाश, रामनारायण, मंगद राम, जय सिंह, ठाकुर प्रसाद, चंद्रशेखर, रामविलास, नारेंद्र, विश्राम, रोशनलाल, अरविंद, रामनरेश, निर्मल, गुड्डू, रामकुमार, नीरज, रामरहीस, श्रीकृष्ण, सर्वेश, रामलखन, राकेश, जयराम, प्रेमचंद्र, बलवीर, संतोष, रवि, बृजनंदन, मथुरा, अनिल कुमार, सियाराम, ओमकार और गोविंद के मकानों को चपेट में ले लिया। आग देख गांव में अफरातफरी मच गई। ग्रामीण आग बुझाने का प्रयास करने लगे लेकिन मकान झोपड़ीनुमा होने के कारण आग फैलते ही गई।
सूचना पर फायरब्रिगेड की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। छिबरामऊ से भी दमकल गाड़ी मंगाई गई। फायरब्रिगेड कर्मचारी ग्रामीणों के साथ मिलकर करीब छह घंटे बाद आग बुझा सके लेकिन तब तक घरों में रखा अनाज, कपड़े, बरतन, जेवर, नगदी समेत लाखों रुपये का सामान जल चुका था। घर में लगी आग में रामप्रकाश का 12 वर्षीय पुत्र पुष्पेंद्र फंस गया। जलने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
सूचना पर उप जिलाधिकारी सदर सुनील शुक्ला, तहसीलदार राजेश कुमार, लेखपाल अमित मिश्रा, विमल कुमार समेत अन्य राजस्वकर्मी मौके पर पहुंचे। मृतक पुष्पेंद्र के पिता को चार लाख रुपये का चेक मदद के तौर पर दिया गया। वहीं ग्रामीणों को नुकसान के अनुपात में 4100 रुपये से लेकर 7900 रुपये तक दिए गए। पीड़ितों को खाने तक के लाले पड़े हैं। रविवार को ग्रामीणों को खुले आसमान के नीेचे रहना पड़ा। कपड़े तक जल जाने से लोगों को तमाम तरह की दिक्कतों से जूझना पड़ा।