अमर उजाला ब्यूरो
इंदरगढ़/कन्नौज। सात समंदर पार कर लाख बहोशी पक्षी बिहार आने वाले विदेशी पक्षियों ने ठीक से सांस भी नहीं ले पाई कि शिकारियों ने शनिवार को कई विदेशी और दुर्लभ देशी पक्षियों का शिकार कर मार डाला। पक्षियों का शिकार करते देखकर ग्रामीणों ने उन्हें खदेड़ लिया। झील के आसपास पक्षियों के शव अवशेष देखने के बाद मामले को छिपाने के लिए वन कर्मियों ने शवों को ठिकाने लगाने के बाद अवशेषों को जला दिया। इससे वन कर्मियों के भी शिकारियों से मिले होने के संकेत हो रहे है।
सर्दियां आते ही जिला मुख्यालय से दूर शांत वातावरण में स्थित लाख बहोशी पक्षी विहार में अफगानिस्तान, साइबेरिया, यूरोपीय और अन्य एशियाई देशों से बड़ी संख्या में विदेशी मेहमान पक्षी समूह बनाकर आने लगे है। विदेशी पक्षियों के आने के साथ-साथ शिकारी भी इन्हें मारने के लिए पक्षी बिहार में डेरा डाल दिया है। शनिवार को शिकारियों ने कई नार्थन शॉवेलर, और कॉमन कूट पक्षियों का शिकार किया। सरेआम पक्षी बिहार की झीलों में पक्षियों का शिकार करते देखकर ग्रामीणों ने शिकारियों को खदेड़ दिया। इस दौरान कई पक्षियों के शव छोड़कर शिकारी भाग निकले। इस दौरान ग्रामीणों ने विदेशी पक्षियों के अवशेषों को भी झाड़ियों में देखा। मामले की जानकारी के बाद पक्षी बिहार में तैनात वन कर्मियों ने झाड़ियों में आग लगाकर पक्षियों के अवशेष जला दिए। जबकि शवों को ठिकाने लगा दिया।
सूत्रों की मानें तो सर्दियों में साइबेरिया और यूरेपीय के पक्षियों के मांस की मांग पक्षियों के गर्म होने की वजह से इससे शिकारियों के निशाने पर साइेबेरियन नार्थ शॉवलेर और कॉमन कूट पक्षी निशाने पर है। लाख बहोशी पक्षी विहार में खुलेआम शिकारियों द्वारा विदेशी मेहमान पक्षियों का शिकार की बात पर वन रक्षक और वन कर्मी टाल मटोल का जबाब देते मिले है। लुप्त प्राय परियोजना उत्तर प्रदेश के सरंक्षक आरके सिंह ने बताया कि विदेशी पक्षियों का शिकार होना बेहद चिंताजनक बात है। शिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। शिकारियों से सांठगांठ करने वाले लोगों की जांच होगी। जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।
नहीं मिलती जमानत, फिर भी शिकारी बेखौफ
विदेशी और प्रतिबंधित पक्षियों का शिकार करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। शिकार करने वाले लोगों पर वर्ल्ड लाइफ एक्ट 1972 के तहत धारा 52,53 और 54 के तहत मुकदमा दर्ज होता है। करीब दो साल तक जेल में रहने के बाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने का प्रावधान है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार शिकार जाल और पत्थर मारकर झील किनारे पक्षियों का शिकार करते है। पकड़े न जाने के कारण यह लोग पंख नोचकर झाड़ियों में फेंक देते है। इसके बाद मांस को तस्करी के लिए बोरों में भरकर आसानी से पक्षी बिहार से निकल जाते है। इसमें वन कर्मियों की भी मिलीभगत रहती है।
पक्षी विहार में शिकारियों ने विदेशी पक्षियों का शिकार
क्रासर
लाख बहोशी झील के किनारे पड़े मिले नार्थन शॉवेलर, कॉमन कूट पक्षियों के शव और अवशेष
ग्रामीणों ने शिकारियों को खदेड़ कर भगाया, वन कर्मियों ने शवों को ठिकाने लगाकर जलाए अवशेष
फोटो 27- कॉमन कूट का शव
फोटो 28- नार्थन शॉवेलर का शव
फोटो 29- आग से झाड़ियों में जलते पक्षियों के अवशेष