कन्नौज। गंगा और काली नदी के पास फैली हजारों एकड़ जमीन में तैयार गेहूं की फसल की कब्जेदारी के लिए कटरी में माफिया की चहलकदमी बढ़ने लगी है। हर साल कटरी इलाके में गेहूं की फसल की कब्जेदारी को लेकर खूनी संघर्ष होता है। इस बार भी फसल तैयार होते ही कटाई के लिए गैंगवार की नौबत बनने लगी है। पुलिस महकमे ने अगर जल्द सक्रिय माफिया पर शिकंजा न कसा तो, चुनावी माहौल में बड़ी वारदात घट सकती है।
जिले में गंगा और काली नदी के किनारे बसे इलाके को कटरी के नाम से जाना जाता है। दोनों नदियों के किनारे फैली सरकारी जमीन पर हरदोई और कन्नौज के लघु किसान गेहूं की खेती करते हैं। फसल पकते ही माफिया यहां के खेतों को अपना बताकर तैयार फसल काट लेते हैं। विरोध करने पर हर साल खून खराबा करते हैं। इस बार भी फसल पकते ही माफिया सक्रिय हो गए हैं। 18 अप्रैल को कचहरी टोला निवासी संजय गुप्ता ने भिम्मापुरवा निवासी कमलेश, दिनेश, विनोद, सर्वेश, विपिन कुमार, राकेश, संतोष के खिलाफ जबरिया 50 बीघा खेत पर कब्जा करने का मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस जांच कर रही है। कोतवाल विनोद कुमार मिश्रा ने बताया कि कटरी के इलाकों, जहां से ऐसी शिकायतें आ रही हैं, जांच की जा रही है। जो लोग जबरन किसानों की फसलें काट रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।
इन गांवों के खेतों पर होता कब्जा
काली और गंगा नदी के दोनों ओर सरकारी जमीन पर हर साल कब्जे के लिए ताबड़तोड़ गोलियां गूंजती हैं। खेतों में खड़ी फसलों को काटने के लिए कई बार कन्नौज व हरदोई के पक्षों के बीच खूनी संघर्ष हो चुका है। इसके अलावा स्थानीय माफिया भी दबंगई के बल पर किसानों की फसलें काट लेते हैं। कई सालों से हरदोई जनपद के कटरी बिलुही, बिछुईयां व कटरी महादेवा समेत कन्नौज के गांव भिम्मापुरवा, रायपुर लड़ैता, डहलेपुर, कटरी अमीनाबाद में कब्जेदारी के लिए संघर्ष हो चुका है।
गेहूं पकते ही कटरी में माफिया की बढ़ी चहलकदमी
हर साल काली और गंगा नदी किनारे किसानों की फसल को जबरिया काटने को लेकर होता है खूनी संघर्ष