छिबरामऊ। बीती 22 जून को लूट का शिकार हुई महिला ने बुधवार रात मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार हुए शातिर अपराधी धर्मसिंह उर्फ धर्मा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने से ही इन्कार कर दिया।
मैनपुरी के गांव तेजगंज निवासी अंजू राठौर अपने पति शिव कुमार और बच्चों के साथ मामा के बेटे की शादी में शामिल होने गई थी। 22 जून को वह बहन के घर नई बस्ती जा रही थी। निगम मंडी के पास जाम लगा होने के कारण वह बहन के देवर के साथ खेतों के रास्ते जाने लगी। इसी बीच बाइक सवार तीन लोगों ने तमंचे के बल पर अंजू से जेवर लूट लिए। बीते बुधवार की रात छिबरामऊ कोतवाली पुलिस ने मुठभेड़ के बाद बदमाश धर्म सिंह उर्फ धर्मा, उसके हिस्ट्रीशीटर बेटे अनुज और रिंकू उर्फ राजीव गुप्ता को गिरफ्तार किया था। पुलिस का दावा है कि पूछताछ में धर्मा ने 22 जून को लूट की घटना अंजाम देना स्वीकार किया है। अंजू ने भी गुरुवार को कोतवाली पहुंचकर धर्मा की शिनाख्त की थी। खास बात यह है कि इतनी बड़ी वारदात होने के बाद भी अंजू और उसके परिजनों ने धर्मा के खिलाफ लूट की रिपोर्ट दर्ज कराने से इन्कार कर दिया। कोतवाल जय प्रकाश शर्मा कहते हैं कि धर्मा शातिर अपराधी है। शायद उसके खौफ के कारण ही अंजू और उसके परिजनों ने रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई।
बरामद करा दिए जेवर, सराफ पर कार्रवाई नहीं
पुलिस का दावा है कि पूछताछ में धर्मा ने बताया था कि अंजू से लूट गए जेवर उसने विशुनगढ़ में एक सराफ के यहां बेच दिए थे। पुलिस टीम ने सराफ के यहां जाकर एक जोड़ी बाली, एक जोड़ी बाला और टूटी हुई अंगूठी बरामद कर ली, लेकिन झाला, मंगलसूत्र और 3500 रुपये नहीं मिले। कोतवाल ने बताया कि सराफ की दुकान से बरामद हुए जेवर अंजू को सौंप दिए गए हैं। सराफ पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसकी वजह खोजने पर पता चली कि धर्मा ने किसी और को जेवर दिए थे, उसने सराफ को बेचे थे। इसी की आड़ में पुलिस ने सराफ पर कोई कार्रवाई नहीं की। कहीं न कहीं इस पूरे घटनाक्रम पर भी सवाल उठ रहा है।