तहसीलदार तिर्वा अनिल सरोज ने नाम शामिल कर ओमप्रकाश को खतौनी सौंपी। संवाद
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कन्नौज। पांच माह से खुद को जिंदा साबित करने की कवायद में लगे ओम प्रकाश ने आखिरकार सोमवार को जीवन पा ही लिया। डीएम के आदेश पर तिर्वा तहसीलदार ने ओम प्रकाश का नाम खतौनी में दर्ज करा दिया। नई खतौनी तहसीलदार ने सोमवार को अपने कार्यालय कक्ष में ओम प्रकाश को सौंपी। पांच माह पहले मृत घोषित ओम प्रकाश चार दिन में जिंदा हो गया।
सरसई भड़हा निवासी ओम प्रकाश ने बीती 22 जुलाई को डीएम शुभ्रांत शुक्ला से जनता दर्शन में मुलाकात की थी। इस दौरान उसने डीएम को बताया था कि बीती 17 फरवरी को राजस्व निरीक्षक और लेखपाल ने जानबूझकर उसे मृत दर्शाकर कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए खतौनी से नाम काट दिया था। उसका दावा था कि ग्राम सरसई में दर्ज खातेदार में वह अब भी जीवित है।
पूरा मामला पता चलने पर ओम प्रकाश ने तिर्वा तहसील में गुहार लगाई। इस पर लेखपाल और राजस्व निरीक्षक ने गलत रिपोर्ट निरस्त कर दूसरी आख्या न्यायालय तहसीलदार तिर्वा में पेश की, लेकिन फिर भी उसकी समस्या का निस्तारण नहीं हुआ। इस पर डीएम ने एसडीएम तिर्वा गरिमा सिंह और तहसीलदार अनिल सरोज को निस्तारण कराकर अवगत कराने के निर्देश दिए। इसी क्रम में सोमवार को तहसीलदार ने अपने कार्यालय कक्ष में संशोधित खतौनी ओम प्रकाश को सौंपी, जिसमें उसका नाम खातेदार के तौर पर दर्ज है। ओम प्रकाश ने खुद के जिंदा साबित हो जाने के लिए डीएम का आभार जताया।
खेल करने वाला लेखपाल है जेल में
तहसीलदार अनिल सरोज बताते हैं कि तत्कालीन लेखपाल विवेक पाल ने ओम प्रकाश को मृत दर्शाकर खतौनी से नाम हटाया था। विवेक पाल इन दिनों जेल में है। दरअसल बीती 29 अप्रैल को उसे एंटी करप्शन टीम ने दस हजार रुपये की घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। हालांकि ओम प्रकाश के मामले में तहसीलदार कहते हैं कि जो कुछ हुआ वह एक नाम के दो लोगों होने की वजह से हुआ। यह बात और है कि दोनों के पिता का नाम अलग है।